ग्रेटर नोएडा में खेत से निकाली 20 लाख की मिट्टी और छोड़ गए 12 फीट गहरी जमीन, तत्कालीन डीएम समेत चार अधिकारी तलब
ग्रेटर नोएडा के जिला एवं सत्र न्यायालय ने बोड़ाकी गांव के किसान की शिकायत पर तत्कालीन डीएम मनीष कुमार वर्मा समेत चार अधिकारियों को तलब किया है।

कोर्ट ने जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा समेत चार अधिकारियों को तलब किया है।
HighLights
तत्कालीन डीएम समेत चार अधिकारी कोर्ट में तलब।
किसान की जमीन से 20 लाख की मिट्टी निकाली।
बोड़ाकी गांव में 12 फीट गहरी हुई जमीन।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। जिला एवं सत्र न्यायालय ने बोड़ाकी गांव निवासी किसान की शिकायत पर दाखिल क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा समेत चार अधिकारियों को तलब किया है। मामले में अदालत ने मनीष कुमार वर्मा के अलावा तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र सिंह, जिला खनन अधिकारी उत्कर्ष त्रिपाठी और तत्कालीन जिला खनन अधिकारी निर्मल सिंह को 25 अगस्त 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का अंतिम अवसर दिया है।
करीब 20 लाख रुपये की मिट्टी निकाली
बोड़ाकी गांव निवासी किसान बलराज भाटी की ओर से अधिवक्ता चौधरी हरिराज सिंह ने अदालत में याचिका दाखिल की थी। आरोप है कि चमरावली-रामगढ़ गांव स्थित किसान की जमीन से करीब 20 लाख रुपये की मिट्टी निकालकर न्यू बोड़ाकी रेलवे जंक्शन और डेडिकेटेड फ्रेट काॅरिडोर कारपोरेशन (डीएफसीसी) परिसर में डाल दी गई।
15 बीघा जमीन पर आने-जाने का रास्ता बंद
किसान का दावा है कि मिट्टी निकालने के कारण उनकी जमीन करीब 12 फीट गहरी होने से खेती योग्य नहीं रह गई। बलराज भाटी और उनके परिवार के पास गांव में करीब 40 बीघा जमीन थी। इसमें से वर्ष 2021 में 25 बीघा भूमि कारिडोर के लिए अधिग्रहीत कर ली गई। रेलवे जंक्शन की बाउंड्रीवाल बना दी। आरोप है कि अधिग्रहण से बची करीब 15 बीघा जमीन पर आने-जाने का रास्ता बंद हो गया।
जांच में क्या-क्या मिला?
बोरिंग भी बंद होने से शेष भूमि पर खेती प्रभावित हो रही है। 21 अगस्त 2024 को वह खेत पर पहुंचे तो रेलवे परिसर की बाउंड्रीवाल से उनकी जमीन की ओर एक गेट खुला मिला। रैंप भी बनाया गया था।
किसान ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत के आदेश पर मामले की जांच पुलिस आयुक्त से कराई गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस रिपोर्ट में रेलवे की ओर से खेत तक पहुंचने के लिए गेट और रैंप बनाने व मौके पर मिट्टी का रैंप मिलने का उल्लेख किया गया था।
25 अगस्त को उपस्थित होने के आदेश
हालांकि, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने शिकायत खारिज कर दी थी, तब किसान ने जिला एवं सत्र न्यायालय में क्रिमिनल रिवीजन दाखिल की। प्रकरण की सुनवाई के बाद सत्र अदालत ने तत्कालीन डीएम समेत चार अधिकारियों को तलब किया है।
अधिवक्ता के अनुसार रेलवे बोर्ड की चेयरमैन जया वर्मा और डीएफसीसी के अधिकारी अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से अदालत में उपस्थित हो चुके हैं, जबकि अन्य अधिकारियों की गैरहाजिरी पर अदालत ने दोबारा समन जारी करते हुए 25 अगस्त को उपस्थित होने का अंतिम अवसर दिया है।
