ग्रेटर नोएडा: दादरी में 4 साल से अधूरे सुलभ शौचालय, लाखों का बजट स्वाहा; खुले में शौच जाने को मजबूर लोग
दादरी तहसील में प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत योजना के तहत बने शौचालय चार साल से अधूरे पड़े हैं। लापरवाही ...और पढ़ें

दादरी तहसील में दम तोड़ रही PM की स्वच्छ भारत योजना
HighLights
दादरी तहसील में स्वच्छ भारत शौचालय चार साल से अधूरे.
सैकड़ों फरियादी खुले में शौच जाने को मजबूर.
अधिकारियों की लापरवाही से सरकारी धन बर्बाद.
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा (दादरी तहसील)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी सुलभ शौचालय योजना दादरी तहसील में अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही के चलते दम तोड़ती नजर आ रही है।
लाखों रुपये की लागत से बन रहे शौचालय पिछले चार साल से अधूरे पड़े हैं, जिसके चलते तहसील में आने वाले सैकड़ों फरियादियों को खुले में शौच जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार लगभग चार साल पहले दादरी तहसील परिसर में दो सुलभ शौचालयों के निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य तहसील में रोजाना आने वाले वादकारियों, किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों को स्वच्छ शौचालय की सुविधा देना था। लेकिन, निर्माण शुरू होने के कुछ महीने बाद ही ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया। तब से लेकर आज तक ये दोनों शौचालय अधूरे हालात में लटके हुए हैं।
दरवाजे, खिड़की, टाइल्स का काम अधूरा
मौके पर जाकर देखा तो शौचालयों की दीवारें तो खड़ी हैं , दरवाजे, खिड़की, टाइल्स, पानी की फिटिंग और सेप्टिक टैंक का काम अधूरा पड़ा है। आसपास झाड़ियां उग आई हैं और निर्माण के लिए लगाया गया , टोटी और अन्य सामान धीरे-धीरे चोरी हो रहा है। लाखों की सरकारी धनराशि बर्बाद हो रही है।
तहसील में प्रतिदिन 500 से अधिक लोग अपने मुकदमों, खतौनी, प्रमाण पत्रों और अन्य राजस्व कार्यों के लिए आते हैं। महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। शौचालय न होने से लोगों को आसपास या खुले में जाना पड़ता है, जिससे स्वच्छता की पूरी मुहिम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पूर्व दादरी बार अध्यक्ष ने कई बार की शिकायत
पूर्व दादरी बार अध्यक्ष अधिवक्ता राकेश नागर ने बताया कई बार एसडीएम और तहसीलदार से इसकी शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो ठेकेदार पर कोई कार्रवाई की और न ही बजट का दूसरा आवंटन कर काम पूरा कराया।
जब इस संबंध में अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। सवाल यह है कि जब तहसील परिसर जैसे सरकारी कार्यालय में ही स्वच्छ भारत मिशन की यह हालत है तो गांव-देहात में इसकी जमीनी हकीकत क्या होगी? जनता अब शासन से इस पूरे मामले की जांच कर अधूरे शौचालयों को जल्द पूरा कराने की मांग कर रही है।
