विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रामपुर तिराहा कांड: अलग राज्य तो मिला मगर 32 साल बाद भी न्याय की उम्मीद में उत्तराखंड के आंदोलनकारी

Published: Sat, 03 Oct 2026 08:11 AM (IST)

उत्तराखंड को अलग राज्य तो मिल गया, पर रामपुर तिराहा कांड के पीड़ितों को 32 साल बाद भी न्याय नहीं ...और पढ़ें

मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर रोके गए उत्तराखंड के आंदोलनकारी। सौ. इंटरनेट मीडिया

मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर रोके गए उत्तराखंड के आंदोलनकारी। सौ. इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. 32 साल से रामपुर तिराहा कांड के न्याय का इंतजार।

  2. पुलिस अत्याचार और गोलीबारी में सात आंदोलनकारी हुए थे बलिदान।

  3. रामपुर तिराहा कांड के दो मुकदमे अभी भी विचाराधीन।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। उत्तराखंड के आंदोलनकारियों को अलग राज्य तो मिल गया, पर न्याय की उम्मीद 32 साल से अधूरी ही है। आंदोलनकारियों को रामपुर तिराहा पर रोकने के बाद पुलिसकर्मियों ने जुल्म किया था। आंदोलनकारियों पर वह रात भयावह गुजरी थी।

पुलिसकर्मियों के अत्याचार व गोलीबारी में सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। इस कांड में उत्तर प्रदेश पुलिस और पीएसी के जवान आरोपित हैं। अभी न्यायालय में रामपुर तिराहा कांड से जुड़े दो मुकदमे लंबित हैं।

आंदोलनकारियों पर अत्याचार की कहानी

उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि 32 साल पहले एक और दो अक्टूबर 1994 के बीच की रात पृथक राज्य उत्तराखंड के गठन की मांग के लिए आंदोलनकारी दिल्ली के लिए चले थे।

ये आंदोलनकारी बसों समेत वाहनों में सवार होकर जा रहे थे। इन्हें पुलिस ने रामपुर तिराहा पर रोक लिया था। उस रात लगभग 11 बजे हंगामा शुरू हो गया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने आगे बढ़ रहे आंदोलनकारियों पर अत्याचार किया।

पुलिस ने गोलियां दागी और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे। तलाशी के नाम पर बसों से उतारकर महिलाओं के साथ जुल्म किया गया। आंदोलनकारी आज भी उस भयावह रात को याद कर सिहर उठते हैं। पुरुषों के साथ लाठीचार्ज के अलावा गोली मारी गई। महिलाओं से दुष्कर्म किया गया।

आंदोलनकारी हाई कोर्ट की शरण में पहुंचे थे, तब सीबीआइ ने जांच की और सात मुकदमे दर्ज कराए थे। इनमें दो मुकदमे राज्य बनाम राधा मोहन द्विवेदी व एसपी मिश्रा प्रकरण विचाराधीन हैं। राज्य बनाम ब्रजकिशोर प्रकरण में निर्णय सुनाया जा चुका है।

आंकड़ों पर एक नजर

  • 1 व 2 अक्टूबर-1994 की घटना
  • 25 जनवरी-1995 को सीबीआइ ने दर्ज किए मुकदमे
  • 56 मुकदमे मुजफ्फरनगर व देहरादून में दर्ज किए
  • 7 मुकदमे मुजफ्फरनगर में दर्ज किए गए
  • 21 मार्च-1996 को सीबीआइ ने चार्जशीट पूर्ण की।
  • 18 मार्च-2024 दुष्कर्मी सिपाहियों को मिली सजा
  • 30 जून 2026 को फर्जी हथियार बरामदगी के मामले में सुनाई गई सजा
  • 2 मुकदमों की न्यायालय में चल रही सुनवाई
  • 6 आरोपित पुलिसकर्मियों की हो चुकी पहचान

ये आंदोलनकारी हुए थे बलिदान

देहरादून की नेहरू कालोनी निवासी रविंद्र रावत उर्फ गोलू, भालावाला निवासी सतेंद्र चौहान, बदरीपुर निवासी गिरीश भदरी, अजबपुर निवासी राजेश लखेड़ा, ऋषिकेश निवासी सूर्यप्रकाश थपलियाल, ऊखीमठ निवासी अशोक कुमार और भानियावाला निवासी राजेश नेगी आंदोलन में बलिदान हुए थे।

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड की गीता में पहाड़ सी हिम्मत, गुलदार ने किया हमला... दराती लेकर डटी रही... उल्टे पैर भागा आदमखोर

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सर्वे से तय होगा कांग्रेस प्रत्याशियों का भाग्य