श्रीराम के जन्मस्थान पर बयान देकर बैकफुट पर आए ST हसन, कालिख पोत प्रदर्शन के बाद बोले- 'राम भारत के आदर्श'
पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर दिए बयान के बाद माफी मांगी है। हिंदू संगठनों ...और पढ़ें

एसटी हसन
HighLights
विरोध की आंच पहुंची तो पूर्व सांसद ने बदला रुख, कटघर थाने में शिकायत से गरमाया मामला
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। भगवान श्रीराम को लेकर दिए गए बयान ने समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डा. एसटी हसन को मुश्किल में डाल दिया है। बयान के इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद शुरू हुआ विरोध अब राजनीतिक सरगर्मी में बदल गया है। हिंदू संगठनों के सड़क पर उतरने, पोस्टर पर कालिख पोतने और पुलिस से शिकायत करने के बाद पूर्व सांसद ने माफी मांग ली है।
उनका कहना था कि हालात सभी को पता हैं। श्रीराम पूरे भारत के लिए आदर्श हैं। इंसानियत के लिहाज से हम सभी उनकी इज्जत करते हैं। अगर मेरे बयान से किसी की आस्था को ठेस पहुंची है तो क्षमा चाहता हूं।
पूर्व सांसद का बयान 31 अक्टूबर को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इसमें उन्होंने भगवान श्रीराम के जन्मस्थान को लेकर सवाल उठाए थे।
राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अयोध्या में खोदाई से जुड़े तथ्यों पर भी टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने नाराजगी जताई।
अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। लोहिया अस्पताल से मार्च निकालकर पूर्व सांसद के पोस्टर पर कालिख पोती और कटघर थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की भी मांग की थी।
इस विरोध ने मामले को स्थानीय राजनीति के केंद्र में ला दिया। धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे पर चौतरफा घिरने के बाद डा. एसटी हसन को अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा।
उन्होंने माफी मांगकर विवाद को विराम देने की कोशिश की है। हालांकि, उनके बयान और उसके बाद माफी मांगने के घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
विरोध के बीच राजनीतिक दबाव बढ़ा
शहर की राजनीति में पूर्व सांसद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सपा के भीतर भी नेताओं के बीच खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप चर्चा में हैं। ऐसे में भगवान श्रीराम पर टिप्पणी और उसके बाद माफी मांगने को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है।
विरोधियों को उन्हें घेरने का मौका मिला तो हिंदू संगठनों ने भी इसे मुद्दा बना दिया। अब निगाह इस बात पर है कि माफी के बाद मामला शांत होता है या सियासी बयानबाजी आगे भी जारी रहती है।
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