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मुरादाबाद में बड़ा खेल: परिवहन अफसर का ड्राइवर ही निकला खनन माफियाओं का 'जासूस', लोकेशन बेचकर हर महीने कमा रहा लाखों

Published: Thu, 08 Oct 2026 02:00 AM (IST)

मुरादाबाद में परिवहन विभाग के एक संविदा चालक पर खनन माफिया को अधिकारियों की लोकेशन बेचकर लाखों कमाने का आरोप ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मुजफ्फरनगर तैनाती, मुरादाबाद के अफसरों की दे रहा लोकेशन

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। रात का अंधेरा गहराते ही खनन के डंपरों के पहिए घूमने लगते हैं, लेकिन इन पहियों की रफ्तार सड़क देखकर नहीं, बल्कि एक फोन काल से तय होती है। परिवहन विभाग के अफसर किस सड़क पर हैं, कहां चेकिंग चल रही है और किस रास्ते से लौट रहे हैं...इसकी खबर पहले ही डंपर संचालकों तक पहुंच जाती है।

इस पूरे खेल की सबसे अहम कड़ी विभाग के ही कर्मचारी हैं। एक अफसर का संविदा चालक इनका मुखिया है। लोकेशन बेचने से मिलने वाली कमाई की रकम सभी उसी को देते हैं।

मुरादाबाद के दिल्ली रोड स्थित एक कस्बे के रहने वाले फहीम की भर्ती इंटरसेप्टर के संविदा चालक के रूप में मुजफ्फरनगर में हुई थी। कागजों में तैनाती भी वहीं बताई जा रही है, लेकिन मुरादाबाद में एक अधिकारी की सरकारी गाड़ी चलाने की जिम्मेदारी उसके पास है।

अधिकारी ने अपने सरकारी चालक को दूसरे काम में लगा रखा है। आरोप है कि सरकारी वाहन तक पहुंच ने उसे डंपर संचालकों के बीच खास बना दिया है। अधिकारी सड़क पर निकलते नहीं कि उनकी लोकेशन जानने के लिए फोन घूमने लगते हैं।

फिर कुछ ही देर में यह सूचना आगे पहुंच जाती है यानी जिस गाड़ी का काम अफसर को कार्रवाई की जगह तक पहुंचाना है, उसी गाड़ी से निकलने वाली जानकारी कार्रवाई से पहले ही बाहर पहुंचने का आरोप है।

वाट्सएप पर सबसे अधिक सूचनाएं अदान-प्रदान करने का दौर चलता है। डंपर संचालकों के बीच फहीम की पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा रहा है कि अधिकारी की लोकेशन जानने के लिए उसके मोबाइल पर फोन पहुंचते हैं।

वही बताता है कि साहब सो रहे हैं। इसके लिए उसने कोड बना रखे हैं। कोड में बात होती है। इशारा समझते ही डंपर के चालक चलते और रुकते हैं। लोकेशन देने के लिए सुविधा शुल्क भी मिलती है।

इस खेल में केवल विभागीय लोग ही नहीं, बल्कि कुछ निजी लोगों के जुड़े होने की भी चर्चा है। एक पूर्व विधायक के रिश्तेदार और उनका साथी जानेआलम नाम का युवक भी लगा हुआ है। आरोप है कि नेटवर्क ने जिले के डंपरों के साथ दूसरे वाहनों पर भी पकड़ बना रखी है।

ओवरलोड डंपर सड़कों को रौंद रहे हैं। भारी वजन से सड़कें टूट रही हैं और सरकारी धन से बनी सड़कें समय से पहले जवाब दे रही हैं। इसके बावजूद निगरानी तंत्र सवालों के घेरे में है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कार्रवाई करने निकले अफसरों की लोकेशन ही पहले बिक जाए तो फिर सड़क पर नियमों की हिफाजत कौन करेगा?

शाम होते ही जागता है नेटवर्क

यह पूरा खेल दिन के उजाले में बल्कि शाम ढलने के साथ तेज होने का आरोप है। रातभर चेकिंग और डंपरों की आवाजाही के बीच लोकेशन का आदान-प्रदान चलता रहता है। सुबह होने तक यह सिलसिला जारी रहने की बात सामने आ रही है।

फहीम अकेला नहीं है। वर्दी में चलने वाले दो दीवान भी इस नेटवर्क में सक्रिय बताए जा रहे हैं। इनके अलावा आकाश, शंभू और प्रधान नाम के तीन निजी लोग भी अफसरों के साथ चलते हैं।

अफसर निकले चेकिंग को, डंपर पहले ही गायब

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों के साथ पीटीओ भी रात में वाहनों की चेकिंग के लिए निकलते हैं। विभाग में अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें पहुंचने की बात भी सामने आई है।

सवाल यह है कि अगर अफसरों की लोकेशन पहले ही डंपर संचालकों तक पहुंच रही है तो सड़क पर कार्रवाई के लिए बचता क्या है? उत्तराखंड की सीमा से खनन सामग्री लेकर आने वाले डंपरों को लेकर यह नेटवर्क खास चर्चा में है।

 

डीएम के निर्देश पर पुलिस-खनन विभाग और जीएसटी के अधिकारियों की टीम हमारे अधिकारियों के साथ मिलकर चेकिंग अभियान चला रही है। ओवरलोड डंपर प्रतिदिन बंद भी हो रहे हैं। अफसरों की लोकेशन बताना गंभीर अपराध है। इस तरह शिकायत मिलने पर जांच करके कार्रवाई करेंगे।

- संदीप सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी(प्रवर्तन), मुरादाबाद


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