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मुरादाबाद नजूल भूमि मामला: करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा कराने वाला लेखपाल निलंबित, विधायक की पैरवी भी नहीं आई काम

Published: Tue, 13 Oct 2026 08:27 PM (IST)

मुरादाबाद में करोड़ों की नजूल भूमि पर अवैध कब्जा कराने के आरोप में लेखपाल अमर सिंह को निलंबित कर दिया ...और पढ़ें

आरोपित लेखपाल पंकज हयांकी

आरोपित लेखपाल पंकज हयांकी

HighLights

  1. खुद, साथी लेखपाल व सिविल लाइंस पुलिस की मदद से दिनदहाड़े कराई दीवार, अब प्राथमिकी की तैयारी

  2. 25 जून को तत्कालीन मंडलायुक्त से हुई थी शिकायत, जांच में खुल गई कराए गए अवैध कब्जे की पूरी पटकथा

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। छावनी के लेखपाल अमर सिंह ने लाकड़ी फाजलपुर के साथी लेखपाल पंकज हयांकी व सिविल लाइंस पुलिस की मदद से करोड़ों की नजूल भूमि फ्री होल्ड के नाम पर मंडी बास निवासी सर्राफ वंदना अग्रवाल पत्नी आलोक कुमार अग्रवाल को कब्जा करा दी। इतना ही नहीं आनन-फानन में दीवार भी लगवा दी जिससे कब्जा कोई टस से मस ना कर पाए।

मगर, मामले में शिकायत के बाद लेखपाल के खेल की पूरी कहानी उजागर हो गई। जिसके बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर एसडीएम अभय सिंह ने लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर भूलेख अनुभाग रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय से संबद्ध कर दिया।

तहसीलदार सदर को विभागीय जांच सौंपी गई है। दोषियों पर आपराधिक कार्यवाही प्रारंभ करने के भी निर्देश दिये गए हैं जिससे प्रकरण में लेखपाल व पूरे खेल में शामिल लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी भी तय मानी जा रही है।

मामला सिविल लाइंस स्थित पीलीकोठी के पास की नजूल भूमि का है। कारोबारी श्वेता जैन ने बताया कि 18 जून को राजस्व लेखपाल अमर सिंह एवं पंकज हयांकी सिविल लाइंस थाने की बड़ी संख्या में फोर्स लेकर दोपहर करीब साढ़े तीन बजे तब आ धमके जब वह घर पर नहीं थीं।

घर पर सिर्फ बुजुर्ग सास-ससुर थे। कोई कुछ समझ पाता कि मकान के बगल में लगे लान पर दीवार लगवाकर सर्राफ वंदना अग्रवाल को कब्जा करा दिया। कब्जे के संबंध में इस दौरान लेखपाल ने कोई आदेश भी नहीं दिखाया।

वापस आकर अगले ही दिन जिला प्रशासन से लेकर पुलिस अफसरों तक शिकायत की। 25 जून को तत्कालीन मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह से शिकायत की। सहायक पुलिस अधीक्षक को जांच दी गई। एसडीएम ने भी जांच की।

फ्री होल्ड के नाम पर कब्जा कराई गई भूमि के प्रपत्र देखे गए। नजूल की भूमि हस्तांतरण से पूर्व शासन की अनुमति अनिवार्य होती है। मगर, प्रकरण में कोई अनुमति नहीं ली गई।

वंदना अग्रवाल ने नौ मई 2000 को जिलाधिकारी की स्वीकृति का हवाला दिया जबकि पत्रावली पर कोई स्वीकृति नहीं मिली। जिससे साफ हो गया कि फ्री होल्ड की कार्यवाही हुई ही नहीं।

फ्री होल्ड की दशा में जमीन पर कब्जा दिलाने का कार्य सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है। मतलब अवैध कब्जे की पूरी पटकथा उजागार हो गई। सोमवार को डीएम के समक्ष पूरी रिपोर्ट रखी गई। जिसके बाद उनके निर्देश पर कार्रवाई हुई।

लेखपाल के फोन पर पहुंचने वाली सिविल लाइंस पुलिस और साथी लेखपाल सुरक्षित

पूरे घटनाक्रम में दूसरे लेखपाल पंकज हयांकी व सिविल लाइंस पुलिस की भूमिका भी उजागर हो चुकी है। यह भी पता चला कि तय पटकथा ऐसी थी कि सिर्फ लेखपाल के फोन पर ही सिविल लाइंस थाने की भारी भरकम फोर्स मौके पर जा धमकी।

मगर, अब तक की कार्रवाई में लेखपाल पंकज के साथ सिविल लाइंस की पुलिस भी सुरक्षित है लेकिन, प्रकरण में जिस तरह से खेल में शामिल सभी पर आपराधिक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिये गए हैं।

उससे सभी पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। फिलहाल, प्रकरण के बाद राजस्व विभाग और पुलिस के गठजोड़ से जिले में जमीनों पर अवैध कब्जों का खेल खुल चुका है।

भाजपा विधायक की पैरवी भी ना आई काम

विभागीय कर्मियों के अनुसार, लेखपाल अमर सिंह को बचाने के लिए भाजपा विधायक ने खूब पैरवी की। इससे पहले हर बार वह विधायक की पैरवी से बच जाता था। मगर, अबकी बार विधायक की पैरवी भी काम ना आई।

अफसरों ने जब विधायक को लेखपाल का पूरा चिट्ठा बताया ताे उन्होंने भी चुप्पी साध ली। अब लेखपाल की पुरानी कुंडली भी तैनातीवार खंगाली जा रही है। उसके नजदीकियों का भी पूरा चिट्ठा तैयार किया जा रहा है।

 

प्रकरण में निलंबन के साथ आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिये गए हैं। इस तरह के खेल में शाामिल कर्मियों के विरुद्ध सरकारी आचरण नियमावली के विरुद्ध आचरण पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। किसी भी दशा में ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

- अनुनय झा, डीएम


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