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यूपी में अस्पताल की बड़ी लापरवाही, नवजात की अदला-बदली की; बेटे की जगह बेटी थमाने पर खुला राज

Published: Tue, 03 Nov 2026 12:46 PM (IST)

मुरादाबाद के मेडविन अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही से दो नवजात बदल गए। एक परिवार को बेटे की जगह बेटी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. मुरादाबाद अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही से नवजात बदले गए।

  2. एक परिवार को बेटे की जगह बेटी सौंप दी गई।

  3. हंगामा होने पर बच्चों को उनके असली माता-पिता को लौटाया।

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। अस्पताल में नवजात की पहचान और सुरक्षा को लेकर बरती गई लापरवाही ने दो परिवारों को परेशानी में डाल दिया। करूला स्थित मेडविन अस्पताल में स्टाफ ने एक परिवार को दूसरे का नवजात सौंप दिया।

रामपुर के बड़ा खास निवासी नाजमा के स्वजन रेनू यादव के नवजात बेटे को अपना समझकर घर ले गए। उधर, सोमवार को छुट्टी के समय रेनू के स्वजन को बेटा देने के बजाय बेटी सौंप दी। विरोध और हंगामे के बाद दोनों नवजात की अदला-बदली का मामला सामने आया।

रामपुर के धमोरा निवासी रेनू यादव पत्नी राजेंद्र को 31 अक्टूबर को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी दिन उन्होंने बेटे को जन्म दिया। परिवार में पहले से दो बेटियां हैं। तीसरे बच्चे के रूप में बेटे के जन्म से परिवार में खुशी थी।

बेटे की जगह गोद में बेटी थमा दी

रेनू के ससुर उनमान सिंह के अनुसार, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और उपचार संबंधी दस्तावेजों में बेटे के जन्म का पूरा रिकार्ड मौजूद है। इसी अस्पताल में रामपुर के बड़ा खास निवासी नाजमा ने बेटी को जन्म दिया था। रविवार देर रात करीब दो बजे उनकी छुट्टी हुई।

आरोप है कि स्टाफ नर्स ने नाजमा के स्वजन को रेनू का बेटा सौंप दिया। स्वजन भी बच्चे की ठीक से पहचान किए बिना उसे लेकर गांव चले गए। सोमवार शाम रेनू की छुट्टी के दौरान स्टाफ ने उनके स्वजन को बेटी थमा दी। बेटे की जगह बेटी मिलने पर उन्होंने आपत्ति जताई। शुरुआत में अस्पताल स्टाफ ने गलती स्वीकार नहीं की, लेकिन विरोध और हंगामा होने पर बच्चों की अदला-बदली का मामला सामने आया।

इसके बाद अस्पताल प्रबंधन रेनू के स्वजन को लेकर बड़ा खास गांव पहुंचा। वहां से नवजात बेटे को वापस लाया गया और दोनों बच्चों को उनके वास्तविक माता-पिता को सौंप दिया। अस्पताल संचालक के अनुसार, वह रविवार को जरूरी काम से लखनऊ गए थे। उनकी अनुपस्थिति में स्टाफ नर्स से यह चूक हुई।

दोनों नवजात के जन्म और पहचान का पूरा ब्योरा अस्पताल के दस्तावेजों में है। बच्चों को उनके वास्तविक परिवारों तक पहुंचा दिया है। संबंधित स्टाफ नर्स की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। रेनू के स्वजन ने लिखित में दिया है कि अब उन्हें कोई शिकायत नहीं है।

वहीं, नाजमा ने बताया कि छुट्टी के समय उनके स्वजन ने बच्चे की पहचान ठीक से नहीं की और सीधे गांव चले गए। उन्होंने भी अस्पताल की लापरवाही को गलत बताते हुए कहा कि नवजात की पहचान में स्टाफ को सावधानी बरतनी चाहिए थी।

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