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मुरादाबाद डीएम की नई पहल: 6 साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोगों को मिनटों में मिला असलहा लाइसेंस

Published: Sat, 31 Oct 2026 07:06 PM (IST)

मुरादाबाद के डीएम अनुनय झा ने शस्त्र लाइसेंस की विरासत से जुड़े सालों पुराने मामलों को सुलझाने की पहल की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. डीएम की पहल पर निकलनीं शुरू हुईं धूल फांक रहीं विरासत की फाइलें

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। गांवों में कहा जाता है कि शस्त्र का नया लाइसेंस बनवाने में जितनी मेहनत है। उससे दोगुणी मेहनत है विरासत कराने में। कलक्ट्रेट के असलहा आफिस में धूल फांक रहीं विरासत की फाइलें इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। लाइसेंसियों के वारिसानों को विरासत के लिए चक्कर ना लगाना पड़े। डीएम अनुनय झा ने इसको लेकर पहल की है।

जिसके बाद विरासत के लिए सालों से धूल फांक रहीं फाइलें बाहर निकलने लगीं हैं। शुक्रवार को कलक्ट्रेट सभागार में 36 वारिसान पहुंचें, जिनकी डीएम ने हाथों-हाथ विरासत की प्रक्रिया पूरी कर दी। इन 36 में सबसे पुराना मामला साल 2020 का सामने आया।

पता चला कि चक्कर लगाते-लगाते जब वह थक गए तो उन्होंने उम्मीद भी छोड़ दी। मगर, इस बीच उनके पास असलहा आफिस से फोन पहुंचा और विरासत की बात बताई गई तो उम्मीद की किरण जाग उठी।

विरासत के लिए पहुंचे एक-एक आवेदकों से डीएम ने पूछा कि उन्हें कितने समय से दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस दौरान एक युवक ने बताया कि वह वर्ष 2020 से भटक रहे थे, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी।

वहीं, एक व्यापारी ने छह दिन पहले ही डीएम से मिलकर गुहार लगाई थी। उनका मामला भी हाथोंहाथ निस्तारित कर दिया गया। डीएम ने आवेदकों से यह भी पूछा कि शस्त्र कार्यालय में किसी ने रुपये तो नहीं मांगे। सभी ने इससे इन्कार किया।

इस पर डीएम ने स्पष्ट कहा कि किसी को भी रुपये देने की जरूरत नहीं है। अनावश्यक चक्कर लगाने या किसी के चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं है। पात्रता और अभिलेख पूरे होने पर सही काम हर हाल में होंगे।

इन तीन स्थितियों में हो सकती है विरासत

सिटी मजिस्ट्रेट एवं आयुध प्रभारी युवराज सिंह ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस की विरासत तीन परिस्थितियों में कराई जा सकती है। पहली, लाइसेंसधारी की मृत्यु होने पर उसके पात्र वारिस के नाम लाइसेंस का हस्तांतरण।

दूसरी, लाइसेंसधारी की उम्र 70 वर्ष या उससे अधिक होने पर और तीसरी, लाइसेंस के 25 वर्ष पूरे होने पर विरासत की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसके लिए पुलिस और तहसील की रिपोर्ट के साथ वारिसान तथा परिवार के सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है।

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