धान छोड़ा, खेत में खिलाया कमल: मुरादाबाद के किसानों का कमाल, 25 हजार लगाकर 3 लाख का मुनाफा
मुरादाबाद के मोढ़ा तैय्या गांव के किसानों ने धान की जगह कमल की खेती अपनाकर लाखों का मुनाफा कमाया है। ...और पढ़ें

मोढ़ा तैय्या गांव में कमल की खेती करते किसान पवन कुमार।। सौ. विभाग
HighLights
फूल से लेकर जड़ तक बेचकर कमा रहे मुनाफा
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। धान की खेती में बढ़ती लागत और मुनाफे की अनिश्चितता के बीच पाकबड़ा क्षेत्र के गांव मोढ़ा तैय्या के प्रगतिशील किसान पवन कुमार ने कमल की खेती में कमाई की नई राह तलाश ली है। कभी धान की फसल के लिए पहचाने जाने वाले खेतों में अब कमल खिल रहे हैं।
फूलों की खूबसूरती के साथ इनकी जड़, तना और बीज भी किसानों की आमदनी बढ़ा रहे हैं। पवन का प्रयोग अब गांव के दूसरे किसानों को भी परंपरागत खेती से आगे बढ़कर सोचने की प्रेरणा दे रहा है।
पवन कुमार बताते हैं कि धान की खेती के मुकाबले कमल से उन्हें बेहतर मुनाफा मिल रहा है। इसकी खासियत है कि फसल का लगभग हर हिस्सा उपयोगी है।
कमल के फूल पूजा-पाठ और सजावट के लिए बिकते हैं, जबकि जड़ और तने की सब्जी की भी मांग है। बीज भी बाजार में बेचे जाते हैं। इस तरह किसान एक ही फसल से कमाई के कई रास्ते बना रहे हैं।
छोटे तालाब से शुरू हुआ बदलाव
गांव में कमल की खेती की शुरुआत छोटे तालाब से हुई थी। धीरे-धीरे इसके फायदे सामने आए तो दूसरे किसानों ने भी इसमें रुचि दिखाई। अब गांव के करीब 30 प्रतिशत किसान इस खेती से जुड़ चुके हैं।
यहां का उत्पादन मुरादाबाद के साथ दिल्ली के बाजारों तक पहुंच रहा है। पवन कुमार का कहना है कि धान की खेती में प्रति एकड़ करीब 19 से 24 हजार रुपये खर्च होते हैं।
इसके मुकाबले कमल की खेती में शुरुआती लागत लगभग 25 हजार रुपये बताई गई है। किसानों का दावा है कि बाजार और उत्पादन अनुकूल रहने पर प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफा मिलता है।
हालांकि, वास्तविक कमाई उपज, बिक्री और मजदूरी पर निर्भर करती है।पवन की पहल बताती है कि खेती में नवाचार, बाजार की समझ और सही प्रशिक्षण के सहारे किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते तलाश सकते हैं।
यह भी जानें
उप कृषि निदेशक रविकांत सिंह ने बताया कि किसान परंपरागत खेती के साथ कम लागत वाली वैकल्पिक फसलों की संभावनाएं भी तलाश करे। इसके लिए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर फसल की उपयुक्तता, लागत और बाजार की मांग की जानकारी करें।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को निर्धारित शर्तों के अनुसार सालाना छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अधिसूचित फसलों और निर्धारित शर्तों के अनुसार बीमा सुरक्षा मिल सकती है।
कमल जैसी वैकल्पिक फसल अपनाने से पहले संबंधित योजनाओं की पात्रता और उपलब्धता कृषि विभाग से जरूर पता करें। अनुदान भी मिलता है।
खेती के टिप्स
जिला कृषि अधिकारी डाॅ. राजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि कमल की खेती शुरू करने से पहले खेत में पर्याप्त पानी, उपयुक्त मिट्टी और जलस्तर की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
सबसे पहले छोटे क्षेत्र में प्रयोग करके फसल की लागत और बाजार की मांग का आकलन करें। रोपण के लिए स्वस्थ प्रकंद और उपयुक्त किस्म का चयन कृषि विशेषज्ञों की सलाह से करें।
पानी की गुणवत्ता, खरपतवार और कीट-रोगों की नियमित निगरानी करें। कमल के फूल, तने, जड़ और बीज के संभावित खरीदारों से पहले ही संपर्क बनाएं।
मजदूरी, परिवहन, भंडारण और बिक्री खर्च जोड़कर लाभ का हिसाब तैयार करें। केवल दूसरे किसानों की कमाई देखकर पूरी जमीन पर नई फसल न लगाएं।
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