मैनाठेर बवाल केस: 15 साल पुराने केस में मुरादाबाद कोर्ट का बड़ा फैसला, 16 दोषियों को आजीवन कारावास
पुलिस पर कुरान का अपमान करने का आरोप लगाकर भीड़ ने हमला किया था, जिसमें तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सहित ...और पढ़ें
HighLights
2011 मैनाठेर बवाल में 16 दोषियों को आजीवन कारावास
पुलिस पर हमला, तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार हुए थे घायल
छेड़खानी आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान भड़की थी हिंसा
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मैनाठेर के गांव असालतनगर बघा में छह जुलाई, 2011 को हुए बवाल में एडीजे-दो कृष्ण कुमार की अदालत ने सभी 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। युवती से छेड़खानी के आरोपित को गिरफ्तार करने गई पुलिस पर भीड़ ने कुरान का अपमान करने का आरोप लगाकर हिंसा की थी।
पुलिस को घेरकर जानलेवा हमला किया और तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार की पिस्टल छीनकर उन्हें पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया था। आरोपितों को दोषी करार देने के बाद पुलिस ने फरार दोनों दोषियों को जेल भेज दिया है।
ये हुए थे घायल
इस कांड में डीआईजी, 10 पुलिसकर्मी समेत 18 लोग घायल हुए थे। डीआईजी की गाड़ी, मैनाठेर थाने की जीप, पीएसी वैन और डींगरपुर पुलिस चौकी में तोड़फोड़ कर आग लगा दी थी। इस बीच तत्कालीन डीएम राजशेखर पर डीआईजी को छोड़कर भागने का आरोप लगा था। सुनवाई के दौरान तीन आरोपितों की मौत हो चुकी। छह नाबालिग की फाइल अलग है।

गांव में दबिश देने पहुंची थी पुलिस
गांव में युवती से छेडखानी के आरोपित के घर पुलिस टीम छह जुलाई, 2011 को दबिश देने गई थी। तभी पुलिस पर महिलाओं ने कुरान का अपमान करने का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया था। पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई। इसके बाद गांव के लोगों की भीड़ डींगरपुर के पाकबड़ा तिराहे पर पहुंची और संभल-मुरादाबाद मार्ग पर जाम लगाकर बवाल शुरू कर दिया। लोग पुलिस से भिड़ गए और पथराव कर दिया। फायरिंग भी हुई थी।
हालात संभालने के लिए गए थे तत्कालीन डीआईजी अशाेक कुमार और डीएम राजशेखर
हालात नियंत्रित करने गए तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार, डीएम राजशेखर को भीड़ ने घेर लिया। खुद को चौतरफा फंसा देख डीएम टीम संग बमुश्किल निकल गए। वहीं, डीआइजी अपने स्टाफ संग घिर गए थे। उपद्रवियों ने डीआईजी व पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया था। जान बचाने के लिए डीआईजी पेट्रोल पंप के एक कमरे में घुसे। भीड़ दरवाजा तोड़कर डीआईजी को बाहर निकाल लिया था। उनकी पिटाई शुरू कर दी।
भीड़ ने सरकारी असलहा लूट लिया था
पिस्टल निकालकर डीआइजी अशोक कुमार से हवाई फायरिंग करना चाही, लेकिन भीड़ ने सरकारी असलहा लूट लिया। बेसुध होने पर उन्हें मरा समझकर चले गए। उपद्रव में पुलिस ने डीआईजी के पीआरओ रवि कुमार की शिकायती पर 33 आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
2011 अक्टूबर को 25 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी
मामले की विवेचना इंस्पेक्टर राजेश कुमार चौधरी ने की थी। उन्होंने एक अक्टूबर, 2011 को 25 के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। 23 मार्च को कोर्ट ने 16 आरोपितों को दोषी करार दिया था। साथ ही 27 मार्च को सजा सुनाने आदेश दिया था, लेकिन शुक्रवार को अवकाश होने के चलते शनिवार को दोपहर 12 बजे सुनवाई शुरू हुई। सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में लेकर जाया गया। दोपहर एक बजे कोर्ट ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
यह भी पढ़ें- आठ वर्षीय बच्ची का हत्याराेपित 25 हजार का इनामी सुनील मुठभेड़ में ढेर, आगरा में तीन दिन पहले हुई थी हत्या
इन्हें सुनाई सजा
कोर्ट ने मंजूर अहमद निवासी डींगरपुर, मोहम्मद अली, हाशिम निवासी ललवारा मैनाठेर, मोहम्मद कमरुल, मोहम्मद मुजीफ निवासी मसेबी रसूलपुर मैनाठेर, मोहम्मद यूनुस, रिजवान निवासी लालपुर मैनाठेर, अम्बरीश निवासी शाहपुर चामरान, कासिम निवासी परियावली असमोली संभल, मोहम्मद मोबीन उर्फ मोहम्मद मोहसिन निवासी बरखेड़ा डिडौली अमरोहा, मोहम्मद मुजीब, तहजीब आलम निवासी असदपुर मैनाठेर, जाने आलम निवासी मिलक नवाब मैनाठेर, फिरोज निवासी ताहरपुर मैनाठेर और मोहम्मद नाजिम निवासी असदपुर मैनाठेर।
सजा का होते ही दहाड़े मारकर रोने लगे दोषी
मुरादाबाद। जैसे ही कोर्ट ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तो सभी दहाड़े मार कर रोने लगे। कोर्ट में मौजूद दोषियों के परिवार वाले भी रोते हुए नजर आए।
