299 करोड़ की मुरादाबाद यूनिवर्सिटी का हाल: बाहर से चमचमाता कैंपस, अंदर कॉलम तक टेढ़े... हैंडओवर पर उठे सवाल
मुरादाबाद में 299 करोड़ रुपये के गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय का निर्माण पांच बार समय सीमा बढ़ने के बाद भी अधूरा ...और पढ़ें

गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय।जागरण आर्काइव
HighLights
सितंबर में पीडब्ल्यूडी ने हैंडओवर लेने को लिखा पत्र, बाहर से चमकदार अंदर से काम अधूरे
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बाहर से चमकती इमारत, अंदर अधूरी तैयारियां और निर्माण पूरा करने की बार-बार बढ़ती समय सीमा। 299 करोड़ रुपये से बन रहे गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय की हकीकत यही है। अगस्त 2024 में शुरू हुआ निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। पांच बार समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है।
पहले फरवरी, फिर जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर तक काम पूरा करने का दावा किया गया। अब 30 नवंबर तक निर्माण पूरा करने की बात कही जा रही है।
प्रदेश के तीन नए विश्वविद्यालयों में शामिल मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर में जुलाई से ही भवन में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। वहीं, मुरादाबाद में निर्माण की समय सीमा लगातार बढ़ रही है।
यहां सवाल केवल भवन बनने का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का है। प्रयोगशालाओं, कक्षाओं, पुस्तकालय और बिजली की व्यवस्था पूरी किए बिना विश्वविद्यालय को शैक्षणिक रूप से तैयार नहीं माना जा सकता।
सवाल यह है कि जब विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए जरूरी इंतजाम ही पूरे नहीं हैं तो सितंबर में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विश्वविद्यालय प्रशासन को हैंडओवर लेने के लिए पत्र कैसे लिख दिया? इस पर सवाल उठ रहे हैं।
यही नहीं कैंपस की बिल्डिंग में कई काॅलम लेवल में नहीं है जबकि यह नीचे से ऊपर तक सीधे होने चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन हर 15 दिन में निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर रहा है। इसके बावजूद हर निरीक्षण में अधूरे काम सामने आ रहे हैं।
पुस्तकालय तैयार नहीं है। कक्षाओं में बोर्ड और फर्नीचर की व्यवस्था अधूरी है। बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और प्रयोगशालाओं में भी जरूरी काम बाकी हैं।
ऐसे में विद्यार्थी पढ़ेंगे कहां, प्रयोग कैसे करेंगे और बिजली की पर्याप्त व्यवस्था के बिना शिक्षण कार्य कैसे चलेगा? यदि विश्वविद्यालय को जनरेटर के सहारे चलाना पड़े तो यह भी सवाल है कि स्थायी व्यवस्था किए बिना संचालन की तैयारी क्यों की जा रही है।
भवन खड़े, लेकिन पढ़ाई के इंतजाम अधूरे
विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक भवनों के साथ आधुनिक शिक्षण सुविधाएं, पुस्तकालय, शोध केंद्र और आवासीय भवन बनाए जाने हैं। कुलपति के लिए टाइप-पांच और प्रोफेसरों के लिए टाइप-तीन आवास भी योजना का हिस्सा हैं।
प्रशासनिक भवन, एकेडमिक ब्लाक, सड़कें और मुख्य द्वार समेत कई निर्माण दिखाई देने लगे हैं, लेकिन भवन तैयार होने और विश्वविद्यालय के संचालन लायक होने में बड़ा अंतर है।
निरीक्षण में कई कालम टेढ़े और बाहर निकले होने की बात भी सामने आ चुकी है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता की जांच और कमियों को दूर कराना भी जरूरी है।
अब नवंबर तक निर्माण कार्य पूरा होने की बात कही जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन हर 15 दिन में निरीक्षण करता है, लेकिन निरीक्षण के दौरान कई काम अधूरे मिलते हैं। पूरी तरह काम पूरे होंगे तभी हैंडओवर लेंगे।
- सचिन महेश्वरी, कुलपति, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय
