बागों और हाथियों का संसार: अमानगढ़ में शुरू हुई जंगल सफारी, 32 किमी के सफर में दिखेगा अनूठा नजारा
मुरादाबाद के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी का नया सत्र शुरू हो गया है, जहाँ पर्यटक प्रकृति और वन्यजीवों ...और पढ़ें

अमानगढ़ टाइगर रिजर्व का मुख्य द्वार और टाइगर रिजर्व में घूमता बारहसिंगा सौ.विभाग
HighLights
32 किलोमीटर के सफर में प्रकृति के अनूठे संसार से रूबरू होंगे पर्यटक
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। शहर की भागदौड़, वाहनों के शोर और कंक्रीट की ऊंची इमारतों से दूर कुछ पल प्रकृति के नाम करना चाहते हैं तो अमानगढ़ आपका इंतजार कर रहा है। यहां सुबह की पहली किरण साल और सागौन के ऊंचे पेड़ों से छनकर जमीन पर उतरती है। पत्तों पर ठहरी ओस चमकती है और जंगल की खामोशी को पक्षियों की चहचहाहट तोड़ती है।
इसी प्राकृतिक संसार के बीच कभी हिरणों का झुंड दिखाई देता है तो कहीं हाथियों की चिंघाड़ सुनाई देती है। रविवार से अमानगढ़ टाइगर रिजर्व का जंगल पर्यटकों के लिए खुलने जा रहा है। इसके साथ ही जंगल सफारी का नया सत्र शुरू हो जाएगा।
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में रविवार से ईको पर्यटन सत्र 2026-27 का शुभारंभ होगा। बढ़ापुर विधायक कुंवर सुशांत सिंह केहरीपुर परिसर में नए सत्र का उद्घाटन करेंगे।
इससे पहले सफारी संचालन और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आयोजित बैठक में सफारी शुल्क में 15 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया।
इसके तहत जिप्सी का शुल्क 2280 से बढ़ाकर 2622 रुपये, वाहन प्रवेश शुल्क 300 से 345 रुपये और नेचर गाइड शुल्क 400 से 460 रुपये करने का प्रस्ताव है। भारतीय पर्यटकों का प्रति व्यक्ति शुल्क 100 से बढ़कर 115 रुपये होगा।
विदेशी पर्यटकों के लिए यह 600 से 690 रुपये प्रस्तावित है। वन अधिकारियों के अनुसार करीब 9500 हेक्टेयर में फैला अमानगढ़ केवल जंगल नहीं, बल्कि प्रकृति की एक जीवंत दुनिया है।
यहां पेड़-पौधों से लेकर वन्यजीवों तक जैव विविधता की अनूठी तस्वीर देखने को मिलती है। बाघ और तेंदुए जैसे शिकारी वन्यजीवों के साथ हाथी, भालू, सांभर, चीतल और काकड़ इस जंगल की पहचान हैं।
जंगल में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां 6,524 वन्यजीव दर्ज हैं। इनमें 28 बाघ, 168 तेंदुए और 105 हाथी शामिल हैं। सफारी की शुरुआत केहरीपुर वन परिसर से होगी।
यहां से जिप्सी निर्धारित मार्ग पर झिरना गेट की ओर रवाना होगी। करीब 32 किलोमीटर का आने-जाने का सफर पूरा करने में तीन से साढ़े तीन घंटे लगेंगे। इस सफर में पर्यटकों को जंगल को केवल देखने ही नहीं, बल्कि महसूस करने का मौका मिलेगा।
प्रकृति के दीदार के लिए संवर रहा रास्ता
क्षेत्रीय वनाधिकारी, केहरीपुर (बिजनौर) अंकिता किशोरी ने बताया कि पर्यटकों को जंगल का बेहतर नजारा दिखाने को मिलेगा। खराब रास्तों की मरम्मत के साथ व्यू लाइन भी साफ करा दी है।
इससे जिप्सी में बैठे पर्यटकों को जंगल के भीतर दूर तक देखने का अवसर मिलेगा। चाय-नाश्ते के साथ जनरल स्टोर, कीरिंग और रेडीमेड कपड़ों की दुकानें शुरू करने की तैयारी है।
बच्चों को जंगल, पेड़-पौधों और वन्यजीवों से परिचित कराने के लिए सम्मेलन कक्ष भी बनाया है। अमानगढ़ में ईको-पर्यटन का संचालन केहरीपुर ईको विकास समिति के माध्यम से किया जाता है।
स्थानीय गांवों के चालक और प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को जंगल की जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक वातावरण की जानकारी देते हैं। पिछले सत्र में 3528 भारतीय और नौ विदेशी पर्यटकों ने सफारी की थी।
पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटेरिया क्षेत्र में बदलाव किए गए हैं। चाय-नाश्ते के साथ कुछ और दुकानें बढ़ाई जाएंगी। बच्चों को जंगल और वन्यजीवों से परिचित कराने के लिए सम्मेलन कक्ष भी बनाया गया है।
- आदर्श कुमार, वन संरक्षक, मुरादाबाद मंडल
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