ध्वस्तीकरण के विरोध में मेरठ के उल्देपुर में सड़क पर उतरे किसान, व्यापारी और मकान मालिक; बोले- बचाव को कानून बनाए सरकार
Meerut News:मेरठ के उल्देपुर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है। प्रदर्शनकारी ...और पढ़ें

उल्देपुर में अनिश्चितकालीन धरने को संबोधित करते किसान नेता विजय राघव।
HighLights
उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बचाने को सरकार से कानून बनाने मांग की।
जागरण संवाददाता, मेरठ। उल्देपुर क्षेत्र में बसी अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण के विरोध में शुक्रवार को उल्देपुर चौराहे के पास अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। धरने में शहर के व्यापारी, अस्पताल संचालक के साथ उल्देपुर क्षेत्र के किसान भूखंड खरीदार और कॉलोनियों के मालिक शामिल हुए।
इस दौरान लोगों ने कहा कि जब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को नहीं टाला जाएगा तब तक उनका धरना और आंदोलन जारी रहेगा। वहीं धरने के दौरान वक्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बचाने के लिए कोई कानून बनाने अथवा सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर लाने की मांग की।
संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर के नेतृत्व में उल्देपुर चौराहे के पास शुक्रवार सुबह यह अनिश्चितकालीन धरना और आंदोलन शुरू किया गया। रविंद्र गुर्जर ने बताया कि उल्देपुर क्षेत्र के कॉलोनी के मालिक, मकान और भूखंड खरीदने वाले लोग तथा क्षेत्र के किसानों ने गुरुवार को उनसे मिलकर थ्वस्तीकरण आदेश के विरुद्ध आंदोलन में समर्थन मांगा था।
धरने में बड़ी संख्या में शहर के व्यापारी अस्पताल संचालक और उदयपुर क्षेत्र के किसान कॉलोनी बसाने वाले लोग तथा कॉलोनी में मकान और भूखंड खरीदने वाले आम लोग शामिल हुए। धरने को ओमप्रकाश पाल, गौरव सिंह, प्रवीण चौहान, उल्देपुर के पूर्व प्रधान शीतल चौहान ने संबोधित किया।
इस दौरान रविंद्र गुर्जर और अन्य वक्ताओं ने कहा कि यह कार्रवाई एकतरफा है। पहले आवास विकास और अब मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में अवैध निर्माण की जो सूची प्रस्तुत की है, वह मनमानी है। जिन भवनों को अवैध बताया जा रहा है, उनके मालिकों को ना तो कोई नोटिस दिए गए और नहीं उनका पक्ष जाना गया।
सीधे सूची सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश कर दी गई और कोर्ट ने इन भवनों को सील करने और ध्वस्त करने का आदेश दे दिया। ऐसा ही उल्देपुर में किया जा रहा है। यहां गरीब लोगों ने जमीन खरीदी है। कुछ लोगों ने मकान बनाए हैं।
यह भी पढ़ें- मेरठ के उल्देपुर में कैसे बसीं और किसने बसाईं अवैध कॉलोनियां, न्यायिक आयोग करेगा जांच; MDA अफसरों की बढ़ी धड़कनें
सरकार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बचाने को बनाए कानून
धरने के दौरान आयोजित सभा में संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर और किसान नेता विजय राघव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से गरीब लोगों को बचाने के लिए सरकार को प्रयास करना होगा। केंद्र अथवा प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से बचाव के लिए कोई नया कानून बनाए अथवा कोर्ट में ही पैरवी करके कार्रवाई के आदेश को वापस कराए।
यह भी पढ़ें- मेरठ में बुलडोजर स्वागत पर नितिन नवीन ने जताई नाराजगी, बिना रुके आगे बढ़ गए
उन्होंने कहा कि जब तक कार्रवाई नहीं टलेगी आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेता विजय राघव ने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम के पीछे साजिश नजर आ रही है। कॉरपोरेट जगत को लाभ पहुंचाने तथा जमीनों को हड़पने का षड्यंत्र किया जा रहा है।
मेरठ शहर में ही बड़ी-बड़ी कंपनियां और कॉरपोरेट कंपनियों के 1000 से ज्यादा अवैध निर्माण हैं, लेकिन उन्हें कोर्ट में पेश की गई सूची में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि एक सप्ताह के भीतर इन 1000 अवैध निर्माण की सूची को कोर्ट में पेश करें अन्यथा संगठन इस सूची को लेकर संबंधित अधिकारियों को नोटिस देगा और सुप्रीम कोर्ट को इस मनमानी की जानकारी दी जाएगी।
यह भी पढ़ें- मेरठ: सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट का 16 हजार से अधिक अवैध इमारतों को सील करने का आदेश
उन्होंने कहा कि यदि ध्वस्तीकरण होना है तो यह कार्रवाई सबसे पहले इन बड़ी कंपनियों और कॉर्पोरेट के अवैध निर्माण पर की जाए इसके बाद आम आदमी अपने निर्माण को खुद ही तोड़ लेगा।
