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मेरठ के उल्देपुर में कैसे बसीं और किसने बसाईं अवैध कॉलोनियां, न्यायिक आयोग करेगा जांच; MDA अफसरों की बढ़ी धड़कनें

By Anuj Sharma Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 24 Sep 2026 12:42 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों की गहन जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता ...और पढ़ें

फाइल फोटो

फाइल फोटो

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में गठित किया आयोग

  2. अवैध निर्माण को तत्काल तोड़ने और मलबा रोजाना हटाने का भी दिया सुप्रीम कोर्ट ने आदेश

जागरण संवाददाता, मेरठ। सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सोमवार को हुई सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद गुरुवार सुबह सुप्रीम कोर्ट का आदेश वेबसाइट पर अपलोड हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उल्देपुर क्षेत्र में विकसित की गई अवैध कॉलोनियों के मामले में गहन जांच करने के लिए पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित कर दिया है।

यह आयोग पांच बिंदुओं पर पूरे मामले की जांच करेगा। जिसमें इन कॉलोनी की जमीन की प्रकृति कॉलोनी के मानचित्र और अवैध कॉलोनीयों के निर्माण के लिए प्राधिकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करने और उनके नाम सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही प्राधिकरण अधिकारियों को इस क्षेत्र के सभी अवैध निर्माण को ध्वस्त करने और उनका मलबा रोजाना हटाने का आदेश कोर्ट ने दिया है।

सेंट्रल मार्केट मामले में अवमानना के केस की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश जेबी पाडीवाला और न्यायाधीश के वी विश्वनाथन ने सोमवार 21 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान उल्देपुर क्षेत्र में हुए अवैध कॉलोनी के निर्माण पर गंभीर चिंता जताई है और इसके समाधान के लिए सख्त आदेश भी दिया है।

गुरुवार सुबह न्यायालय का आदेश वेबसाइट पर अपलोड हुआ जिसके मुताबिक न्यायालय ने प्रदेश शासन द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को पढ़कर उल्देपुर में विकसित हुई सैकड़ो अवैध आवासीय कॉलोनी पर गहरी चिंता जताई और इसकी विस्तृत और गहन जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की आवश्यकता महसूस की।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादी विभाग के अधिवक्ता से इन कॉलोनीयों के संबंध में जानकारी ली तो बताया गया कि इन आवासीय कॉलोनी की जमीन निजी है और आम लोगों द्वारा यहां भूखंड खरीदे गए हैं। मेरठ विकास प्राधिकरण से इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है और नहीं कोई मानचित्र स्वीकृत कराया गया है।

सेवानिवृत न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित

सुप्रीम कोर्ट ने उल्देपुर के अवैध निर्माण की गहन जांच के लिए पांच बिंदु निर्धारित किए और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया को न्यायिक आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया । कोर्ट ने उन्हें जांच को सुचारु और प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए आयोग में अन्य सदस्यों को भी शामिल करने की अनुमति दी है।

कोर्ट ने कहा है कि आयोग आवश्यक समझे तो पांच बिंदुओं के अलावा अन्य मुद्दे या प्रश्न की भी जांच के लिए स्वतंत्र रहेगा। प्रदेश सरकार आयोग के लिए सचिवालय और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराएगी। पी गुरु प्रसाद को आयोग के अध्यक्ष का नोडल अधिकारी न्यायालय ने नियुक्त किया है। आयोग को सचिवालय तथा प्रशासनिक सहायता उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।

आयोग के सदस्यों को भुगतान किए जाने वाले पारिश्रमिक के लिए राज्य सरकार को 35 लाख रुपये एक सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश भी दिया गया है। यह राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा के रूप में रखी जाएगी

न्यायिक आयोग की जांच के ये है पांच बिंदु

  • क्या उन भू-खंडों की भूमि, जिन पर अवैध आवासीय कॉलोनियां बनाई गई हैं, सरकार के स्वामित्व में है?
  • यदि भूमि सरकार की नहीं है, तो इन विशाल भू-खंडों के वैध स्वामी कौन-कौन हैं?
  • यदि जांच में यह सामने आता है कि भूमि सरकार की नहीं बल्कि विभिन्न निजी व्यक्तियों की है, तो भूमि स्वामियों और खरीदारों के बीच लेन-देन किस प्रकार हुआ?
  • मेरठ विकास प्राधिकरण पांच वर्ष से अधिक समय तक क्यों निष्क्रिय रहा और उसने अपनी आंखों के सामने इन अवैध आवासीय कॉलोनियों को विकसित होने की अनुमति क्यों दी?
  • क्या ये अवैध आवासीय कॉलोनियां मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत एवं सांठगांठ से विकसित हुईं और यदि ऐसा है, तो इसके लिए कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं?

प्रत्येक अवैध निर्माण को यथाशीघ्र ध्वस्त करें

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है की जांच के बीच वह उल्देपुर में विकसित प्रत्येक अवैध निर्माण को जल्द से जल्द ध्वस्त करें। इस ध्वस्तीकरण के दौरान उत्पन्न होने वाले मलबे को भी प्रतिदिन प्रभावित तरीके से हटाया जाए। ताकि आम जनता को उस परेशानी ना हो।