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दो-दो लाख में बिकी सीसीएसयू की फर्जी डिग्रियां, राशन डीलर बनने के लिए बैकडोर से बना दिया ‘टॉपर’

Published: Sun, 04 Oct 2026 01:04 PM (IST)

पूर्णिया में जन वितरण प्रणाली दुकानों के आवंटन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहाँ दो-दो लाख रुपये में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ की फर्जी डिग्रियां बेची गईं।

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HighLights

  1. पूर्णिया में पीडीएस दुकान आवंटन में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर।

  2. सीसीएसयू मेरठ की फर्जी डिग्रियां दो लाख में बेची गईं।

  3. फर्जीवाड़ा सरगना सहित दो सरकारी कर्मी गिरफ्तार, जेल भेजे गए।

जागरण संवाददाता, मेरठ/पूर्णिया। उत्तर प्रदेश के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) मेरठ के नाम का इस्तेमाल कर अंतरराज्यीय स्तर पर फर्जी डिग्रियों की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। सीसीएसयू के नाम से तैयार की गईं बीए और एमए की फर्जी डिग्रियों को बिहार के पूर्णिया जिले में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानों का सरकारी लाइसेंस हासिल करने के लिए खपाया गया है।

दो-दो लाख रुपये में सीसीएसयू व यूपी के संस्थानों की फर्जी डिग्रियां बांटकर अपात्रों को मेधा सूची में टॉपर बना दिया गया। मामले का खुलासा और वसूली का आडियो-वीडियो वायरल होने के बाद पूर्णिया प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी डिग्री बनाने वाले मुख्य सरगना सहित अनुमंडल कार्यालय के प्रधान लिपिक (बड़ा बाबू) और नाजिर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

21 अभ्यर्थियों को बांटी सीसीएसयू की डिग्री, बना दिया टॉपर

पूर्णिया जिले के बनमनखी अनुमंडल में 30 पीडीएस दुकानों के लिए चयन प्रक्रिया चल रही थी। चयन में उच्च शैक्षणिक योग्यता (स्नातक, एमए) वालों को प्राथमिकता मिलनी थी। इसका फायदा उठाने के लिए बनमनखी के जालसाज अमरेंद्र गुप्ता ने एसडीओ कार्यालय के बाबुओं से सांठगांठ कर ली।

वायरल वीडियो में अमरेंद्र गुप्ता ने खुद स्वीकार किया कि उसने अभ्यर्थियों से दो-दो लाख रुपये लेकर 21 लोगों को सीसीएसयू व यूपी के संस्थानों की बैकडेटेड फर्जी बीए व एमए की डिग्रियां उपलब्ध कराईं। इन फर्जी प्रमाण पत्रों में 80.6 प्रतिशत तक अंक दर्शाए गए, जिसके दम पर वास्तविक मेधावी अभ्यर्थी पिछड़ गए और फर्जी डिग्री वाले मेधा सूची के क्रमांक एक पर काबिज हो गए।

आरटीआई में पहले ही फर्जी पाए जा चुके हैं कई प्रमाण पत्र

पूर्णिया जिले भर में 386 दुकानों के लिए आए करीब पांच हजार आवेदनों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने उप्र और विशेष रूप से मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की डिग्रियां लगा रखी थीं।

जांच में यह बात सामने आई है कि इनमें से कई प्रमाण पत्रों को लेकर जब पूर्व में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सीसीएसयू से जानकारी मांगी गई थी, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनका कोई रिकॉर्ड न होने और उन्हें फर्जी होने की पुष्टि की थी।

इसके बावजूद अनुमंडल कार्यालय के प्रधान लिपिक अभिषेक कुमार राय और नाजिर कन्हैया झा ने मोटी घूस लेकर इन फर्जी डिग्रियों को मेधा सूची में पास कर दिया।

मेरठ भेजी जाएंगी डिग्रियां, दर्ज होगा धोखाधड़ी का मुकदमा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार ने लाइसेंस आवंटन पर तत्काल रोक लगा दी है। उन्होंने स्पष्ट आदेश दिया है कि मेधा सूची में शामिल सभी अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का मूल प्रति से मिलान कराने के साथ ही संबंधित विश्वविद्यालय से भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन में फर्जी पाए जाने पर न सिर्फ अभ्यर्थिता रद्द होगी, बल्कि संबंधित आवेदकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।

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