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बागपत में फर्जी डिग्री से अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने का प्रयास, संचालक और डॉक्टर पर केस

Published: Thu, 27 Aug 2026 12:58 AM (IST)

बागपत में एक नए अल्ट्रासाउंड सेंटर के लिए फर्जी एमडी रेडियोलॉजिस्ट की डिग्री का इस्तेमाल किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बागपत में अल्ट्रासाउंड सेंटर के लिए फर्जी डिग्री का उपयोग।

  2. स्वास्थ्य विभाग ने जांच में डिग्री को फर्जी पाया, शिकायत दर्ज।

  3. संचालक और कथित डॉक्टर के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी।

जागरण संवाददाता, बागपत। अल्ट्रासाउंड के पंजीकरण के आवेदनों की जांच में डॉक्टर की डिग्री फर्जी मिलने का मामला सामने आया है। आवेदन को निरस्त करने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालक और डॉक्टर के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई है। पुलिस मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

बागपत शहर में नया अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने के लिए स्वास्थ्य विभाग को मई माह में आवेदन किया गया था। आवेदन में एक महिला के एमडी रेडियोलाजिस्ट दस्तावेज लगाए गए थे। पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डा. मसूद अनवर ने बताया कि पंजीकरण के बाद आवेदन में लगाए गए दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया।

सत्यापन के लिए महिला को बुलवाया गया। महिला से डिग्री के संबंध में जानकारी ली गई, उन्हें कुछ शंका हुई। शंका को दूर करने के लिए संबंधित मेडिकल कॉलेज से डिग्री की जांच कराई गई। उन्होंने बताया कि सत्यापन में डॉक्टर की डिग्री फर्जी मिली है। उन्होंने फर्जी महिला डॉक्टर और संचालक के खिलाफ बागपत कोतवाली में तहरीर दे दी है।

दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी हो रही है। अब आगे की कार्रवाई कोतवाली पुलिस करेगी। उन्होंने बताया कि सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की नियमित जांच कराई जाएगी और चिकित्सकों की डिग्रियों का भी नए सिरे से सत्यापन कराया जाएगा।

सवाल पूछते ही बदल गए हाव-भाव

नोडल अधिकारी डा. मसूद अनवर ने बताया कि जब एमडी रेडियोलाजिस्ट की डिग्री वाली महिला से सवाल किए तो वह सकपका गई। उसके आधे अधूरे जवाब से ही संदेह उत्पन्न हो गया। उसके बाद सत्यापन में डिग्री फर्जी मिलने पर अल्ट्रासाउंड सेंटर के आवेदन को तत्काल निरस्त कर दिया गया है।

तीन लाख में हुआ था अनुबंध

सेंटर में अल्ट्रासाउंड करने के लिए संचालक से कथित महिला डॉक्टर का तीन लाख रुपये में अनुबंध हुआ था। महिला को संचालक की ओर से प्रतिमाह तीन लाख रुपये दिए जाने तय हुए थे। महिला ने दो माह का एडवांस मांगा था, लेकिन तीन लाख पर बात पक्की हो गई थी। महिला को तीन लाख रुपये भी दे दिए गए थे।

कंसलटेंट ने कराया था महिला से संपर्क

संचालक ने लखनऊ में एक कंसलटेंट से संपर्क किया था, जिसके बाद उसने एमडी रेडियोलाजिस्ट महिला से संपर्क कराया और फोन से भी बात कराई थी। महिला ने अपने दस्तावेज व्हाट्सएप पर भेजे थे। उसके बाद ही उन्होंने अल्ट्रासाउंड सेंटर के लिए आवेदन किया था। उन्हें महिला के फर्जी दस्तावेज होने की जानकारी नहीं थी।

आधार कार्ड भी संदिग्ध

अल्ट्रासाउंड के लिए आवेदन करने वाले संचालक ने महिला पर संदिग्ध लगी तो उसके आधार कार्ड की जांच कराई थी। जांच में आधार कार्ड मिसमैच मिला। उसके बाद संपर्क किया तो फोन स्विच आफ मिला। संचालक ने बताया कि महिला जिस गाड़ी में बागपत आई थी, उसका नंबर पुलिस को दे दिया है।