मेरठ में बनेगा 550 एकड़ का विशाल औद्योगिक क्षेत्र, फ्लैटों में चलेंगी फैक्ट्रियां; इन गांवों से खरीदी जाएगी भूमि
मेरठ में 549 एकड़ का नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जिसमें फ्लैटेड फैक्ट्रियां होंगी।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
मेरठ में 549 एकड़ का नया औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित।
फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स बनेंगे, प्रदूषणकारी इकाइयां वर्जित।
1,669 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना से खर्च।
प्रदीप द्विवेदी, मेरठ। अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो एमएसएमई के महत्वपूर्ण केंद्र मेरठ को जल्द ही सरकारी स्तर पर नए औद्योगिक क्षेत्र की सौगात मिल सकती है। शहरी विकास से घिरे गांव रिठानी, मोहकमपुर, कुंडा और सुंदरा उर्फ पूठा से जमीन खरीदकर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है।
महत्वपूर्ण बात यह कि औद्योगिक क्षेत्र वृहद आकार यानी 550 एकड़ का होगा। दूसरा, इसमें सामान्य प्लाट कम होंगे। यहां फ्लैटेड फैक्ट्री कांप्लेक्स बनाए जाएंगे। यानी, एक ही बिल्डिंग में कई फ्लोर पर फैक्ट्री स्थापित करने की सुविधा मिलेगी।
मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के इस प्रस्ताव का औद्योगिक संगठनों ने स्वागत किया है। उद्यमियों का कहना है कि शहर में भूमि उपलब्ध होने के बाद भी उसका विकास नहीं किया गया था। ऐसे में छोटा मवाना तक औद्योगिक इकाइयां स्थापित करनी पड़ीं। औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि खरीद पर 1,669 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसकी व्यवस्था मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना से की जाएगी। मेडा जल्द ही शासन को इसका प्रस्ताव भेजेगा।
खास बात यह कि प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति के तहत विकसित किया जाएगा। इस नीति के तहत मिश्रित भूउपयोग का लाभ मिलता है। इसके अंतर्गत किसी प्लाट में एक भवन के बजाय फ्लैटेड व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाता है।
इन गांवों से खरीदी जाएगी भूमि
| क्र. | गांव | भूमि (एकड़ में) |
| 1 | रिठानी | 329 |
| 2 | मोहकमपुर | 82 |
| 3 | कुंडा | 71 |
| 4 | सुंदरा उर्फ पूठा | 66 |
| कुल | 549 | |
महायोजना-2021 में है भूउपयोग
मेडा ने जिस औद्योगिक भूउपयोग पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव बनाया है, उसे मेरठ महायोजना-2021 में ही आरक्षित कर दिया गया था। किसान अपनी इस भूमि पर खेती कर रहे हैं। इस पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए कभी सरकारी स्तर से पहल नहीं हुई। उद्यमियों ने यहां इसलिए जमीन नहीं खरीदी क्योंकि सड़क व आवश्यक ढांचे का विकास नहीं है। अब यदि इसका विकास होता है तो बड़ा परिवर्तन आएगा क्योंकि यह क्षेत्र शताब्दी नगर, रिठानी और परतापुर स्टेशनों के आसपास है।
औद्योगिक संगठनों ने दिए सुझाव
- औद्योगिक क्षेत्र में प्लाट की कीमत कम रखी जाए। प्राइवेट क्षेत्र में 30 से 45 हजार प्रति वर्ग मीटर की दर से प्लाट हैं, लेकिन सरकार इसमें 12 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास दर रखे।
- परतापुर में 1965 में जिला उद्योग केंद्र ने सबसे पहला सरकारी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया था। उसमें उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए शेड, कार्यालय भवन, शौचालय व बाउंड्रीवाल बनाकर दी थी। उसी तरह की व्यवस्था इसमें भी की जाए।
- युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए धनराशि किस्तों में ली जाए। प्लाट का क्षेत्रफल छोटे उद्यमियों को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाए।
- गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बिजौली में विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्षेत्र में एमएसएमई को प्लाट नहीं दिए जा रहे हैं, इसलिए मेडा के इस नए औद्योगिक क्षेत्र में सिर्फ एमएसएमई को ही प्लाट दिए जाएं।
इन्होंने कहा-
मेडा ने कुछ महीने पहले अब्दुल्लापुर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए बैठक की थी। उसमें अधिकारियों ने कहा था कि उद्यमी स्वयं अपने स्तर से भूमि खरीदें और मेडा उसमें ढांचा विकसित करेगा। वह योजना फ्लाप हो गई। मेडा को इस औद्योगिक क्षेत्र के लिए गंभीरता से काम करना पड़ेगा।
-तनुज गुप्ता, मंडलीय चेयरमैन, आईआईए।
यह बड़ी उपलब्धि होगी, हालांकि मेडा को यह ध्यान रखना पड़ेगा कि वह यूपीसीडा की तरह सस्ती दरों पर प्लाट दे। मेडा की आवासीय योजनाओं में प्लाट महंगे मिलते हैं। मेडा को लाभ के बजाय औद्योगिक विकास पर ध्यान देना होगा। यह क्षेत्र विकसित होता है तो मेरठ की सूरत बदल जाएगी क्योंकि यह भूमि शहरी क्षेत्र में है।
-राजकुमार शर्मा, प्रदेश सचिव, लघु उद्योग भारती
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