सौरभ हत्याकांड: नीला ड्रम देश में बना भय का प्रतीक, इसलिए साहिल-मुस्कान के लिए मृत्युदंड की मांग उठाई
मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को फांसी की सजा सुनाई गई है।

सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी।
HighLights
सौरभ राजपूत हत्याकांड में साहिल और मुस्कान को फांसी।
हत्या योजनाबद्ध, क्रूर; नीले ड्रम में शव छिपाया गया।
पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई।
जागरण संवाददाता, मेरठ। Saurabh Rajput Murder Case | सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार की सुबह निर्णय सुनाए जाने से पहले साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी के लिए जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने फांसी की मांग की।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में दाखिल रिपोर्ट में हत्या को योजनाबद्ध तरीके और अत्यंत क्रूर बताते हुए कहा गया है कि, इस वारदात ने पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है।
हत्या के बाद शव को नीले ड्रम में छिपाने की घटना देश और समाज में भय के प्रतीक के रूप में सामने आई। अभियोजन ने अपराध की प्रकृति, उसे अंजाम देने के तरीके और उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव का हवाला देते हुए दोनों दोषियों को अधिकतम दंड देने की मांग की है। अदालत ने अभियाजन पक्ष की दलील को स्वीकार करते हुए दोनों को फांसी की सजा सुना दी।
30 सितंबर को अदालत ने साहिल और मुस्कान को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। केके चौबे ने अपनी रिपोर्ट में दोषियों की पारिवारिक, शैक्षिक, आर्थिक और मानसिक स्थिति के साथ उनके व्यवहार, सुधार की संभावना और अपराध के सामाजिक प्रभाव का उल्लेख किया है।
तर्क दिया था कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए नरमी बरतना न्याय के उद्देश्य के विपरीत होगा। सौरभ की हत्या अचानक उपजे विवाद या आवेश का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके लिए पहले से योजना बनाई गई और उसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
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हत्या के बाद शव के साथ भी क्रूरता की गई और उसे छिपाने के लिए नीले ड्रम का इस्तेमाल किया गया। वारदात ने लोगों के मन में भय और असुरक्षा की भावना पैदा की। नीला ड्रम इस हत्याकांड की पहचान बन गया और समाज में भय के प्रतीक के रूप में चर्चित हुआ।
दोषियों की पारिवारिक स्थिति का भी कोर्ट में हुआ उल्लेख
दोषियों की पारिवारिक परिस्थितियों का भी कोर्ट में उल्लेख किया गया। बताया कि अपराध की प्रकृति को देखते हुए दोनों के परिजनों ने उनसे दूरी बना ली है। मुस्कान के माता-पिता ने भी कथित तौर पर स्पष्ट किया है कि उनके लिए मुस्कान अब पहले जैसी नहीं रही और वे उसे कड़ी सजा दिए जाने के पक्ष में हैं।
जेल में सामान्य व्यवहार को नहीं माना सुधार का प्रमाण
मुस्कान और साहिल की अधिवक्ता रेखा जैन ने कहा कि जेल में दोनों को आचरण अच्छा रहा। इस पर केके चौबे ने अदालत में बताया कि वारदात के समय साहिल और मुस्कान की उम्र लगभग 28 वर्ष थी। साहिल स्नातक है, जबकि मुस्कान ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।
दोनों की आय और रोजगार का कोई स्रोत नहीं बताया गया है। रिपोर्ट में दोनों को मानसिक रूप से स्वस्थ बताया गया है। साथ ही, उनके पूर्व आपराधिक इतिहास की जानकारी उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख भी किया गया है।
जेल में लगभग डेढ़ वर्ष की अवधि के दौरान दोनों के किसी रचनात्मक, सामाजिक, परोपकारी या समाजोत्थान संबंधी गतिविधि में शामिल होने की जानकारी सामने नहीं आई। जेल में सामान्य व्यवहार करना अपने आप में सुधार की संभावना का पर्याप्त प्रमाण नहीं है।

पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास को पहुंचाई चोट
सौरभ हत्याकांड की चर्चा मेरठ तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश और देशभर में हुई। इस घटना ने पति-पत्नी जैसे विश्वासपूर्ण रिश्ते की गरिमा और पारिवारिक मूल्यों को गहरी चोट पहुंचाई। हत्या के तरीके और शव को छिपाने की घटना ने भी समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा किया।
अपराध की गंभीरता और उसके व्यापक प्रभाव को देखते हुए दोषियों के प्रति नरमी बरतने से न्याय और अपराध की रोकथाम के उद्देश्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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