तीन दिन से बार-बार जीभ निकाल रहा था बेटा, अचानक पिता को याद आया पुराना हादसा तो भाग कर पहुंचा अस्पताल
मेरठ में डेढ़ साल पहले कुत्ते के काटने का शिकार हुए एक बच्चे को जीभ बाहर निकालते देख पिता को ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
डेढ़ साल पहले कुत्ते के काटने से बच्चे में रेबीज का डर।
बच्चे के बार-बार जीभ निकालने पर पिता को हुई आशंका।
सीएचसी में जांच, स्पष्ट लक्षण नहीं, मेरठ रेफर किया गया।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सरधना थाना क्षेत्र के एक गांव में डेढ़ वर्ष पूर्व पालतू कुत्ते के काटने का शिकार हुए 11 वर्षीय बच्चे को पिछले तीन दिनों से बार-बार जीभ बाहर निकालते देख पिता को रेबीज की आशंका हुई।
शनिवार को पिता बच्चे को लेकर सीएचसी पहुंचे। बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्चे की जांच की, लेकिन रेबीज के स्पष्ट लक्षण नहीं मिले। एहतियात के तौर पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगाकर बच्चे को मेरठ रेफर कर दिया गया।
बच्चे को पालतू कुत्ते ने, उसको आवारा ने काटा था
सीएचसी में पिता ने चिकित्सकों को बताया कि कुछ समय पहले उनके पालतू कुत्ते ने बच्चे के उल्टे पैर के अंगूठे में काट लिया था। घटना के चार-पांच दिन बाद सीएचसी में बच्चे को एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई गई थी। इसके कुछ दिन बाद पालतू कुत्ते पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। अब करीब तीन दिन से बच्चा बातचीत के दौरान बार-बार जीभ बाहर निकाल रहा था। तभी मामले की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हो गई।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विरेंद्र सिंह ने बच्चे की जांच की। चिकित्सकों ने कुत्ते के काटने की तारीख पूछी, लेकिन पिता सही तारीख नहीं बता सके। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के रजिस्टर की जांच की गई, जिसमें सामने आया कि बच्चे को वर्ष 2025 में तीन अप्रैल को पहली और सात अप्रैल को दूसरी एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई थी।
रेबीज के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिले
चिकित्सकों ने बच्चे की विभिन्न जांच की। उसे गिलास से थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाकर कुल्ला करने के लिए कहा गया और दोनों हाथों की भी जांच की गई। जांच के दौरान रेबीज के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिले। इसके बावजूद चिकित्सकों ने एहतियात के तौर पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई और बेहतर जांच के लिए बच्चे को मेरठ रेफर कर दिया।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विरेंद्र सिंह ने बताया कि जांच के दौरान बच्चे में रेबीज के स्पष्ट लक्षण नहीं मिले हैं। बच्चे के मानसिक व्यवहार के कारण बार-बार जीभ बाहर निकालने की बात सामने आई है। इसके बावजूद सावधानी के तौर पर उसे वैक्सीन देकर आगे की जांच के लिए मेरठ भेजा गया है।
पिता को रातभर नहीं आई नींद, इंटरनेट पर जुटाते रहे जानकारी
सीएचसी में पिता ने बताया कि बच्चे को लेकर वह पूरी रात इंटरनेट पर तरह-तरह की जानकारी जुटाते रहे। चिंता और लगातार जानकारी तलाशने के चलते उन्हें रातभर नींद नहीं आई। जिसके बाद वह सीएचसी पहुंचे। जहां चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनसे बातचीत कर स्थिति समझाने तथा उन्हें शांत रहने की सलाह दी।
कुत्ता काटने पर समय से लगवाएं एंटी रेबीज वैक्सीन
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कुत्ते के काटने की घटना को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन का पहला टीका जल्द से जल्द लगवाना आवश्यक है। इसके बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निर्धारित अंतराल पर वैक्सीन की अगली डोज दी जाती है।
सामान्यतः तीसरे दिन दूसरी, सातवें दिन तीसरी, 14वें दिन चौथी और 28वें दिन पांचवीं डोज लगाई जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुत्ते के काटने पर घाव को नजरअंदाज न करें और तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेकर समय से उपचार कराएं।
