सेहत वाली होली: ये है मैदा और मावे का विकल्प; तलने की जगह बेकिंग अपनाएं
Healthy Holi Recipes: होली पर पारंपरिक व्यंजनों की जगह स्वस्थ विकल्प अपनाएं। वैद्य चंद्रचूड़ मिश्रा के अनुसार मैदा और मावे का विकल्प मौजूद है। तलने के बजाय बेकिंग चुनें।

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
चीनी के स्थान पर कर सकते हैं खजूर, मुनक्का और अंजीर का प्रयोग।
व्यंजनों को तलने के बजाय बेक करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर।
जागरण संवाददाता, मेरठ। होली पर्व अपनी विशिष्ट खान-पान परंपरा लेकर आता है। रंग खेलने के साथ तरह तरह के व्यंजन भी घरों में बनाए जाते हैं। लेकिन त्यौहार के उत्साह के बीच 'सेहत' अक्सर पीछे छूट जाती है।
होली पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन जैसे गुझिया, मठरी और सेव आमतौर पर मैदा, चीनी और रिफाइंड तेल से बनाए जाते हैं। जो डायबिटीज, मोटापे और हृदय रोगों से जूझ रहे लोगों के लिए चिंता का विषय बन जाते हैं।
वैद्य चंद्रचूड़ मिश्रा बताते हैं कि हमारे प्राचीन ग्रंथों जैसे भोजन कुतूहल, क्षेम कुतूहल और चरक संहिता में स्वस्थ व्यंजनों के ढेरों विकल्प मौजूद हैं। आयुर्वेद के सिद्धांतों को अपनाकर हम बिना स्वाद से समझौता किए एक स्वस्थ और समावेशी' होली मना सकते हैं.
मैदा नहीं, मोटे अनाज को अपनाएं
वैद्य चंद्रचूड़ मिश्रा के अनुसार गुझिया के लिए मैदे के स्थान पर गेहूं, रागी या श्यामक (सांवा) के आटे का प्रयोग किया जा सकता है। ये मोटे अनाज न केवल गुझिया को अधिक करारा बनाते हैं, बल्कि इनमें मौजूद 'रूक्ष' गुण और फाइबर पाचन में सहायक होते हैं। जिससे भारी भोजन के बाद होने वाली कब्ज की समस्या नहीं होती.
मावे की जगह ये विकल्प
मावे के विकल्प के तौर पर नारियल का बुरादा, अंजीर और पिस्ता।
घी में भुनी हुई चना दाल, जौ का आटा, गुड़, किशमिश और मखाने का मिश्रण शक्तिवर्धक स्टफिंग तैयार करता है।
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मधुमेह रोगियों के लिए
चीनी के स्थान पर खजूर, मुनक्का और अंजीर का प्राकृतिक स्वाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
तलने की जगह बेकिंग और सही तेल का करें चयन
वर्तमान परिदृश्य में व्यंजनों को तलने के बजाय बेक करना सबसे उत्तम है। यदि तलना अनिवार्य हो, तो रिफाइंड तेल के स्थान पर तिल का तेल या शुद्ध देसी घी का उपयोग करना चाहिए।
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तली हुई मठरी का विकल्प है रोट
उत्तर भारत का पारंपरिक व्यंजन 'रोट' होली पर तली हुई मीठी मठरी का एक स्वस्थ विकल्प है। इसमें मोटे अनाज, गुड़, सौंफ और खरबूजे की गिरी को गूंथकर तवे पर सेंका जाता है। यह कम घी में तैयार होने वाला स्वाद और सेहत का अनूठा संगम है।
वैद्य चंद्रचूड़ मिश्रा का मानना है कि सामग्री बदलने के साथ-साथ भोजन की मात्रा पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है। व्यक्ति को अपने विवेक और शारीरिक क्षमता के अनुसार ही व्यंजनों का आनंद लेना चाहिए।
