रशियन कल्चर से सराबोर हुआ CCSU: रूसी गीतों, लोक परंपराओं और डांस से रूबरू हुए छात्र
Meerut News: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में तीन दिवसीय 'रशियन अरनामेंट्स' महोत्सव शुरू हुआ, जिसमें रूस के मिनिन यूनिवर्सिटी के दल ने रूसी संस्कृति का प्रदर्शन किया।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में प्रस्तुति देते रूसी कलाकार।
HighLights
सीसीएसयू में तीन दिवसीय 'रशियन अरनामेंट्स' महोत्सव का शुभारंभ।
रूसी लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों ने विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध किया।
जागरण संवाददाता, मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) का परिसर मंगलवार को रूसी संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया। रूस के निजनी नोवगोरोद स्थित मिनिन यूनिवर्सिटी के 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दिवसीय ‘रशियन अरनामेंट्स’ महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
पहले दिन रूसी लोकगीत, नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र और परंपराओं ने विद्यार्थियों को रूस की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। कार्यक्रम का आयोजन ‘माई हिस्ट्री’ फाउंडेशन और मिनिन यूनिवर्सिटी की ओर से रूस के शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है।
महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर सीसीएसयू की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला और मिनिन यूनिवर्सिटी की उप-रेक्टर एलवी येरुश्किना ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद महोत्सव और रूसी भाषा पाठ्यक्रम की जानकारी दी गई। मिनिन यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया।

रूसी प्रतिनिधियों को सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद सम्मानित करतीं कुलपति डॉक्टर संगीता शुक्ला।
‘रूसी पैटर्न’ में दिखे संस्कृति के विविध रंग
उद्घाटन के बाद मिनिन यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और विद्यार्थियों की रचनात्मक टीम ने ‘रशियन पैटर्न्स’ शीर्षक से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘वोल्गा नदी के किनारे’ गीत से हुई। इसके बाद ‘युवतियां और शरारती युवक’ नृत्य और ‘सुनहरे गुंबदों वाली मास्को’ गीत ने दर्शकों की तालियां बटोरीं।
इसके बाद ‘रूसी जूते’, ‘कालिंका’, ‘मैं सड़क पर निकलूंगी’ और ‘मेरी खुशी रहती है’ जैसी प्रस्तुतियों ने रूसी लोकजीवन और संगीत की विविधता को सामने रखा। कलाकारों ने ‘बारिन्या’, ‘डान नदी के उस पार’, ‘एक शाम’ और ‘और मैं घास के मैदान में’ जैसी प्रस्तुतियों के जरिए ग्रामीण रूस की लोक परंपराओं और नृत्य शैली की झलक दिखाई।
कार्यक्रम के दौरान रूसी लोकसंगीत में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक वाद्ययंत्रों की भी जानकारी दी गई। कलाकारों ने डफली, लकड़ी की चम्मचों और बालालाइका जैसे वाद्ययंत्रों के बारे में बताया। तीन तारों वाली बालालाइका ने विशेष आकर्षण पैदा किया।
इसके बाद ‘मैं रूस के ऊपर उड़ रहा हूं’, ‘हमें हंसते-खेलते जीना है’ और ‘रूसी शौर्य’ जैसी प्रस्तुतियों ने माहौल को और जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का समापन ‘मातृभूमि रूस’ की सामूहिक प्रस्तुति से हुआ, जिसमें कलाकारों ने गीत और नृत्य के माध्यम से रूस के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। इन्हें दर्शकों की खूब तालियां मिलीं
परीकथाओं से समझी रूसी संस्कृति
सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद दोपहर में विद्यार्थियों और रूसी भाषा के शिक्षकों के लिए अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। ‘रूसी लोककथाओं में रूसी संस्कृति के कान्सेप्ट’ और ‘रूसी संस्कृति को समझने की कुंजी के रूप में खान-पान से जुड़े मुहावरे’ विषयों पर व्याख्यान हुए। इनमें रूसी लोककथाओं, भाषा, परंपराओं और खान-पान से जुड़े सांस्कृतिक संदर्भों पर चर्चा की गई।
इसके बाद ‘पाला और सूरज, कितना सुंदर दिन’ विषय पर मास्टर क्लास आयोजित हुई। इसमें रूसी भाषा को विदेशी भाषा के रूप में पढ़ाने के दौरान कान्सेप्चुअल विश्लेषण के तरीकों को समझाया गया। विद्यार्थियों ने रूसी परीकथाओं पर आधारित ‘रूसी परीकथाओं का मैराथन’ इमर्सिव गेम में भी भाग लिया।
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भाषा के साथ संस्कृति समझने पर जोर
मिनिन यूनिवर्सिटी की उप-रेक्टर एलवी येरुश्किना ने कहा कि भारत और रूस के बीच शिक्षा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर देते हैं।
सीसीएसयू की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि किसी देश को समझने के लिए केवल उसके बारे में पढ़ना पर्याप्त नहीं है। उसकी भाषा, साहित्य, संगीत, कला और सांस्कृतिक परंपराओं को समझना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘रशियन अरनामेंटस’ भारत और रूस के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने वाली पहल है।
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12 सदस्यीय दल आया है रूस से
मिनिन यूनिवर्सिटी का 12 सदस्यीय दल 27 सितंबर को मेरठ पहुंचा था और दो अक्टूबर को रवाना होगा। दल में तीन प्रोफेसर, एक वीडियो आपरेटर, छह कलाकार और दो समन्वयक एवं दुभाषिए शामिल हैं। महोत्सव 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक चलेगा। दूसरे दिन रूसी साहित्य की परीकथा परंपराओं पर व्याख्यान, ‘रूसी आत्मा की पहेलियां’ इमर्सिव गेम, ‘आइए एक परीकथा बनाएं’ मास्टर क्लास और ‘रूसी इज़्बा की ध्वनिमय दुनिया’ इंटरैक्टिव प्रदर्शनी होगी।
तीसरे दिन विभिन्न रूसी समुदायों की परीकथाओं पर वर्चुअल यात्रा, भाषाई एवं खान-पान आधारित मास्टर क्लास और ‘डांस अरनामेंटस’ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
