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CBSE: मार्कशीट और सर्टिफिकेट से जुड़ी जानकारी सही न होने से हो सकती है बड़ी परेशानी, छात्र इन बातों का रखें ध्यान

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 25 Sep 2026 02:21 PM (IST)

सीबीएसई ने 10वीं-12वीं की मार्कशीट में डेमोग्राफिक डिटेल सुधार के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब अधूरे आवेदन सीधे ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो

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HighLights

  1. सीबीएसई ने साफ किया कि डिटेल सही रखने की जिम्मेदारी केवल बोर्ड की नहीं, स्कूल, विद्यार्थी और अभिभावक सभी की भूमिका। 

  2. डेमोग्राफिक डिटेल में गलती पर स्कूलों की होगी जिम्मेदारी, अधूरे आवेदन होंगे खारिज, विद्यार्थी सुधार को स्कूल के माध्यम से करें आवेदन।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सीबीएसई की कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट में नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि समेत अन्य व्यक्तिगत जानकारी सही रहे, इसके लिए बोर्ड ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं। अब परिणाम जारी होने के बाद डेमोग्राफिक डिटेल में सुधार के लिए भेजे जाने वाले अधूरे आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसे आवेदन सीधे खारिज कर दिए जाएंगे।

सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक डा. संयम भारद्वाज के अनुसार बोर्ड विद्यार्थियों और स्कूलों को रिकार्ड जांचने और गलतियों को ठीक कराने के लिए कई मौके देता है। इसके बावजूद हर साल परिणाम जारी होने के बाद बड़ी संख्या में सुधार के आवेदन पहुंचते हैं। इससे मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होती है।

प्रवेश से लेकर बोर्ड परीक्षा तक कई बार होती है जांच

सीबीएसई ने साफ किया है कि विद्यार्थी की डेमोग्राफिक डिटेल सही रखने की जिम्मेदारी केवल बोर्ड की नहीं है। इसमें स्कूल, विद्यार्थी और अभिभावक सभी की भूमिका है। स्कूलों को प्रवेश फार्म, स्कालर रजिस्टर, एडमिशन-विथड्राल रजिस्टर और ट्रांस

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फर सर्टिफिकेट में दर्ज विवरण को सही रखना होगा।

कक्षा नौ में पंजीकरण के समय विद्यार्थी का नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि समेत अन्य विवरण दर्ज किए जाते हैं। इस दौरान स्कूल और अभिभावक इसकी जांच करते हैं। पंजीकरण के बाद बोर्ड की ओर से सुधार का मौका भी दिया जाता है। स्कूलों को विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन कार्ड डाउनलोड कर उन्हें उपलब्ध कराने होते हैं, ताकि विद्यार्थी और अभिभावक एक बार फिर सभी विवरण जांच सकें।

कक्षा 10वीं की एलओसी (लिस्ट आफ कैंडिडेट्स) भरने से पहले स्कूलों को कक्षा नौ का पंजीकरण डेटा उपलब्ध कराया जाता है। स्कूल और अभिभावक इसमें दर्ज जानकारी की दोबारा पुष्टि करते हैं। एलओसी जमा होने के बाद भी बोर्ड की ओर से सुधार का अवसर दिया जाता है।

एडमिट कार्ड में भी कराई जाती है जानकारी की पुष्टि

बोर्ड परीक्षा से पहले जारी होने वाले एडमिट कार्ड में दर्ज विवरण भी जांचने का मौका मिलता है। विद्यार्थी, अभिभावक और प्रधानाचार्य से यह पुष्टि कराई जाती है कि इसमें दी गई जानकारी सही है।

परिणाम जारी होने के बाद मार्कशीट-कम-पासिंग सर्टिफिकेट तैयार करते समय भी डेमोग्राफिक डिटेल की पुष्टि संबंधी अंडरटेकिंग ली जाती है। यही व्यवस्था कक्षा 11वीं और 12वीं के स्तर पर भी लागू रहती है।

बोर्ड के अनुसार, परीक्षा और परिणाम से पहले विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत विवरण की जांच और सुधार के करीब 20 अवसर मिलते हैं। इसके बावजूद परिणाम के बाद सुधार के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आना चिंता का विषय है।

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पुराने रिकार्ड नहीं मिलने से भी अटकते हैं मामले

सीबीएसई के अनुसार सुधार के लिए स्कूलों की ओर से भेजे जाने वाले कई आवेदन अधूरे होते हैं। कई मामलों में विद्यार्थी ने जिन पुराने स्कूलों में पढ़ाई की होती है, वहां के रिकार्ड आवेदन के साथ नहीं लगाए जाते। कुछ दस्तावेज इतने अस्पष्ट होते हैं कि उनमें दर्ज जानकारी पढ़ना मुश्किल होता है। कई मामलों में कटिंग या ओवरराइटिंग वाले दस्तावेज भी भेज दिए जाते हैं। बोर्ड की ओर से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने के बाद भी कई बार स्कूल समय पर जवाब नहीं भेजते। ऐसे मामलों के कारण सुधार प्रक्रिया लंबी हो जाती है।

 

अधूरे आवेदन होंगे सीधे खारिज

सीबीएसई ने अब स्पष्ट कर दिया है कि डेमोग्राफिक डिटेल में सुधार के लिए भेजे जाने वाले आवेदन के साथ सभी जरूरी और प्रमाणित रिकार्ड पूरे रूप में उपलब्ध कराने होंगे। विद्यार्थी ने जिन पूर्व स्कूलों में पढ़ाई की है, वहां से संबंधित प्रमाणित रिकार्ड भी आवेदन में शामिल करना होगा।

यदि आवेदन अधूरा मिला या जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए तो बोर्ड उसे खारिज कर देगा। स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास उपलब्ध सभी रिकार्ड में विद्यार्थी की जानकारी एक जैसी और सही हो।

विद्यार्थी सीधे बोर्ड को न भेजें आवेदन

सीबीएसई ने विद्यार्थियों के लिए भी प्रक्रिया स्पष्ट की है। डेमोग्राफिक डिटेल में सुधार के लिए विद्यार्थी सीधे बोर्ड को आवेदन न भेजें। उन्हें अपने स्कूल के माध्यम से ही आवेदन करना होगा।

बोर्ड के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं, जिनमें विद्यार्थियों ने सीधे बोर्ड को आवेदन भेजे, कानूनी नोटिस के जरिये सुधार की मांग की या न्यायालय का रुख किया। सीबीएसई ने स्कूलों से कहा है कि विद्यार्थियों को सही प्रक्रिया की जानकारी दी जाए और जरूरी होने पर स्कूल के माध्यम से आवेदन भेजने में उनका मार्गदर्शन किया जाए।

बोर्ड का कहना है कि स्कूलों के पास विद्यार्थी के पुराने रिकार्ड उपलब्ध होते हैं। ऐसे में दस्तावेज जुटाने और उनका सत्यापन करने में भी आसानी रहती है। सीधे बोर्ड, कानूनी नोटिस या न्यायालय के माध्यम से आने वाले मामलों में आवश्यक स्कूल रिकार्ड समय पर नहीं मिलने से प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

छोटी गलती आगे बन सकती है बड़ी परेशानी

विद्यार्थी का नाम, माता-पिता का नाम और जन्मतिथि जैसे विवरण केवल स्कूल रिकार्ड तक सीमित नहीं रहते। इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल मार्कशीट, पासिंग सर्टिफिकेट, उच्च शिक्षा में प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सरकारी व आधिकारिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। ऐसे में रिकार्ड में छोटी सी गलती भी आगे चलकर दस्तावेजों के सत्यापन में परेशानी खड़ी कर सकती है।

सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों से कहा है कि पंजीकरण से लेकर एलओसी और परीक्षा तक हर स्तर पर विद्यार्थियों की डेमोग्राफिक डिटेल ध्यान से जांची जाए। बोर्ड का उद्देश्य है कि परिणाम जारी होने के बाद प्रमाणपत्रों में सुधार के मामलों को कम किया जाए और जिन मामलों में वास्तव में संशोधन जरूरी हो, उनका निस्तारण भी समय पर किया जा सके।