एशियन पैरा गेम्स में मेरठ के आयुष वर्मा का जलवा: शॉटपुट में जीता गोल्ड मेडल, एक दिन पहले जैवलिन थ्रो में मिला था कांस्य
मेरठ के पैरा एथलीट आयुष वर्मा ने एशियन पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने गोला फेंक में स्वर्ण ...और पढ़ें

आयुष वर्मा।
HighLights
आयुष वर्मा ने एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
उन्होंने शॉटपुट F-53 स्पर्धा में 8.16 मीटर थ्रो किया।
एक दिन पहले जैवलिन थ्रो में कांस्य पदक भी जीता था।
जागरण संवाददाता, मेरठ। पैरा एथलीट आयुष वर्मा को उनकी निरंतर मेहनत ने एशियन पैरा गेम्स का स्वर्णिम सितारा बना दिया है। मंगलवार को भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) में कांस्य पदक जीतने वाले आयुष ने बुधवार को गोला फेंक (शाटपुट) में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पुरुषों की शाटपुट एफ-53 स्पर्धा में 8.16 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर आयुष ने भारत को प्रतियोगिता का 10वां स्वर्ण पदक दिलाया। दो स्पर्धाओं में लगातार दो पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा और दमदार प्रदर्शन का लोहा मनवाया।
आयुष की इस उपलब्धि से मेरठ के खेल जगत में खुशी की लहर है। मंगलवार को जैवलिन थ्रो की एफ-53/54 संयुक्त स्पर्धा में 17.88 मीटर भाला फेंककर कांस्य पदक जीतने के बाद आयुष ने बुधवार को शाटपुट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। लगातार दो दिन पोडियम पर पहुंचना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।

कोच के साथ आयुष।
पांचवें प्रयास में हासिल किया स्वर्णिम लक्ष्य
शाटपुट एफ-53 स्पर्धा में आयुष ने शुरुआत 7.39 मीटर के थ्रो से की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 7.42 मीटर और तीसरे में 7.50 मीटर गोला फेंका। चौथे प्रयास में उनका प्रदर्शन सुधरकर 7.92 मीटर पहुंच गया। इसके बाद पांचवें प्रयास में आयुष ने 8.16 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक पर अपना दावा मजबूत कर लिया। छठे और अंतिम प्रयास में उन्होंने 7.54 मीटर का थ्रो किया।
जैवलिन थ्रो के बाद शाटपुट में भी किया कमाल
ईरान के अलीरेजा हेमामी ने 8.09 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि कजाकिस्तान के मखाम्बेत सेरिक्कलियेव 6.81 मीटर के प्रदर्शन के साथ तीसरे स्थान पर रहे। आयुष ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
छह साल की मेहनत का मिला दोहरा इनाम
15 जुलाई 1991 को जन्मे आयुष वर्मा ने वर्ष 2020 में पैरा एथलेटिक्स में प्रतिस्पर्धात्मक खेल की शुरुआत की थी। कोच रोबिन कुमार के मार्गदर्शन में उन्होंने गोला फेंक की एफ-53 श्रेणी में अपनी तकनीक, शारीरिक क्षमता और प्रदर्शन को लगातार बेहतर किया। मेहनत के इसी सिलसिले ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
एफ-53 श्रेणी में खिलाड़ी बैठकर थ्रो करते हैं। इसमें शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत, संतुलन, समन्वय और तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सीमित शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद आयुष ने अपनी मेहनत से साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास से अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
अब प्रीति पाल और अनुभव चौधरी पर नजरें
छह साल की मेहनत, लगातार अभ्यास और देश के लिए पदक जीतने के जुनून ने मेरठ के पैरा एथलीट आयुष वर्मा को एशियन पैरा गेम्स का स्वर्णिम सितारा बना दिया है। मंगलवार को भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) में कांस्य पदक जीतने वाले आयुष ने बुधवार को गोला फेंक (शॉटपुट) में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पुरुषों की शॉटपुट एफ-53 स्पर्धा में 8.16 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर आयुष ने भारत को प्रतियोगिता का 10वां स्वर्ण पदक दिलाया। दो स्पर्धाओं में लगातार दो पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा और दमदार प्रदर्शन का लोहा मनवाया।
आयुष की इस उपलब्धि से मेरठ के खेल जगत में खुशी की लहर है। मंगलवार को जैवलिन थ्रो की एफ-53/54 संयुक्त स्पर्धा में 17.88 मीटर भाला फेंककर कांस्य पदक जीतने के बाद आयुष ने बुधवार को शॉटपुट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। लगातार दो दिन पोडियम पर पहुंचना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।
पांचवें प्रयास में हासिल किया स्वर्णिम लक्ष्य
शॉटपुट एफ-53 स्पर्धा में आयुष ने शुरुआत 7.39 मीटर के थ्रो से की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 7.42 मीटर और तीसरे में 7.50 मीटर गोला फेंका। चौथे प्रयास में उनका प्रदर्शन सुधरकर 7.92 मीटर पहुंच गया। इसके बाद पांचवें प्रयास में आयुष ने 8.16 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक पर अपना दावा मजबूत कर लिया। छठे और अंतिम प्रयास में उन्होंने 7.54 मीटर का थ्रो किया।
