जमीन बेची, कर्ज लिया...पति का त्याग लाया रंग; सिमरन शर्मा ने एशियन पैरा गेम्स में जीता गोल्ड
सिमरन शर्मा ने जापान के नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में 200 मीटर टी-12 कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीता ...और पढ़ें

एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड जीतने वाली सिमरन शर्मा, जागरण।
HighLights
सिमरन शर्मा ने एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
पति गजेंद्र ने जमीन बेचकर प्रशिक्षण में मदद की।
यह सफलता उनके संघर्ष और परिवार के त्याग का परिणाम।
शाहनवाज अली, गाजियाबाद। जापान के नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स सिमरन शर्मा ने महिलाओं की 200 मीटर टी-12 कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीता है। सिमरन के जीतोड़ अभ्यास और प्रयासों के बीच उनके पति गजेंद्र सिंह की तपस्या भी कम नहीं है।
गजेंद्र ने सिमरन को अभ्यास कराने के लिए जमीन भी बेची और कर्ज भी लिया, लेकिन पत्नी के सपनों को टूटने नहीं दिया। इसी समर्पण और मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने एशियाई पैरा गेम्स में रजत पदक के बाद इस बार स्वर्ण पदक जीतकर सफलता की नई इबारत लिखी है।
सिमरन की संघर्ष की दास्तान
सिमरन की यह उपलब्धि केवल एक पदक की कहानी नहीं है, बल्कि उस संघर्ष की भी दास्तान है, जिसमें परिवार का त्याग और खिलाड़ी का दृढ़ संकल्प साथ-साथ आगे बढ़े। सिमरन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी हैं। उन्होंने 2024 के पैरालंपिक में 200 मीटर टी-20 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।
वर्ष 2024 की विश्व चैंपियनशिप में 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद 2025 की विश्व चैंपियनशिप में 100 मीटर स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2023 के एशियाई पैरा गेम्स में उनके खाते में दो रजत पदक आए थे। खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2025 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
एथलेटिक्स ट्रैक पर हुई मुलाकात
सिमरन और गजेंद्र सिंह की मुलाकात वर्ष 2015 में एथलेटिक्स ट्रैक पर हुई थी। इसी दौरान सिमरन ने गजेंद्र के साथ अपने खेल और भविष्य के सपनों को साझा किया।
गजेंद्र ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। दोनों ने 29 नवंबर 2017 को शादी की। इसके बाद गजेंद्र ने सिमरन के खेल सफर में सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।
पत्नी के सपनों को दिया पंख
खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए नियमित अभ्यास, प्रशिक्षण और संसाधनों की जरूरत होती है। सिमरन के सफर में आर्थिक चुनौतियां भी आईं। ऐसे समय में गजेंद्र ने उनके खेल को प्राथमिकता दी।
सिमरन के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने नौ लाख रुपये की जमीन बेच दी और 3.50 लाख रुपये का कर्ज भी लिया। परिवार के इस त्याग के बीच सिमरन ने अभ्यास जारी रखा और लगातार प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया।
गोल्ड जीतते ही परिवार में छाईं खुशियां
सिमरन के प्रदर्शन को परिवार व मोदीनगर के लोग टीवी पर लाइव देख रहे थे। अन्य खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए उन्होंने जीत हासिल की तो लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। लोगों में हर्ष का माहौल दिखा। परिवार के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। बधाई देने के लिए आसपास के लोगों का सिमरन के घर तांता लगने लगा।
सिमरन मोदीनगर की तिबड़ा रोड स्थित कृष्णाकुंज कालोनी की रहने वाली हैं, परिवार में मां सविता शर्मा, भाई आकाश शर्मा, भाभी निशा शर्मा हैं। खंजरपुर गांव के गजेंद्र सिंह से सिमरन की शादी हुई है। गजेंद्र भारतीय सेना में हैं। गजेंद्र ही सिमरन के कोच भी हैं।
