मेरठ, जागरण संवाददाता। Air Pollution Meerut मेरठ में दिल्ली रोड से लेकर शहर में हर तरफ धूल ही धूल है। रेत और मिट्टी मिश्रित होकर गुबार बनकर दिन-रात उमड़-घुमड़ रहा है। लोग परेशान हैं। सांस फूल रही है। आंखों में यह धूल पड़ने से वाहन चलाने में परेशानी होने लगी है। सबसे अधिक समस्या दिल्ली रोड पर है। यहां पर रैपिड रेल कारिडोर का कार्य हो रहा है। जिसके लिए निर्माण सामग्री लेकर कंटेनर निकलते हैं।

पानी छिड़काव के लिए टैंकर

सड़क किनारे पाइप लाइन का भी कार्य हुआ है जिससे मिट्टी की परत उखड़ गई है। हाल ही में बरसात से जो कीचड़ हुआ था वह अब धूल बनकर उड़ रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) की ओर से पानी छिड़काव के लिए टैंकर चलते हैं लेकिन ये सिर्फ खानापूर्ति के लिए रह गए हैं। नगर निगम के पास धूल एकत्र करने वाली रोड स्वीपिंग मशीन है, लेकिन यह कहां की धूल एकत्र करती है शहरवासियों को नहीं पता।

फाइल में लागू हुए वायु प्रदूषण नियंत्रण नियम

एनसीआर में प्रदूषण को रोकने के लिए एक अक्टूबर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू हो गया है। इसके तहत वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कार्रवाई होनी है और समाधान वाले कदम उठाए जाने हैं। दो दिन हो गए हैं और शहर में धूल ही धूल है लेकिन इस नियम के तहत धरातल पर कोई समाधान दिखाई नहीं दे रहा है। एक तरफ शहर हांफ रहा है और दूसरी तरफ ग्रैप फाइलों में लागू हो गया है।

सामने दिखना भी होता है बंद

परतापुर ओवरब्रिज है या रेत वाली गलीपरतापुर रेलवे ओवरब्रिज पर डामर की परत की जगह रेत की परत बिछी हुई है। तेज वाहनों के गुजरते ही यह रेत उमड़ पड़ती है और सामने दिखाई देना बंद हो जाता है। जो चौपहिया-तिपहिया में होते हैं या फिर हेलमेट पहने बाइक पर होते हैं वे वाहन संभाल लेते हैं लेकिन जो हेलमेट नहीं पहनते वे लड़खड़ा जाते हैं। इधर-उधर गड्ढे भी हैं। कोई नियंत्रण खो देता है तो कोई दुर्घटना से चोटिल हो रहा है।

शर्म करो...स्वच्छ सर्वेक्षण में शानदार रैंक आई है

हाल ही में जब बरसात हुई तब एनसीआरटीसी की लापरवाही दिखाई दी थी। गैरजिम्मेदाराना तरीके से इसकी कार्यदायी कंपनियों ने कार्य किए। अब जब बरसात समाप्त हो गई तब धूल और रेत उड़नी शुरू हुई है। अब फिर एनसीआरटीसी की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। जबकि यह ऐसी परियोजना है जिस पर केंद्र सरकार के साथ ही एशियन डेवलपमेंट बैंक की सीधी नजर है।

अफसर कर रहे गुमराह

बेहतर कार्य के लिए ही 30 हजार करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण के कदम उठाने व प्रदूषण फैलने से रोकने वाले कदम उठाने का निर्देश है लेकिन शुरुआत बेहतर प्रबंधन की लाहवाही लूटकर इसके कार्य भी लापरवाही वाले हो गए हैं। शहर परेशान है, इसके अफसर दिल्ली में बैठकर गुमराह करने वाले वीडियो व फोटो देखकर पीठ थपथपा रहे हैं। जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को भी शहर की इस स्थिति को देखने की फुर्सत नहीं है। शहर स्वच्छ सर्वेक्षण में देश में शानदार श्रेणी पाने का जश्न कैसे मनाए जब शहर का यह हाल है।  

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Edited By: PREM DUTT BHATT

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