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मेले में छाया 80 लाख का मुर्रा भैंसा ‘अर्जुन राणा’, मारवाड़ी नुकरा घोड़े को देखने उमड़ी भारी भीड़

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Wed, 04 Nov 2026 06:00 AM (IST)

मेरठ के किसान मेले में 80 लाख रुपये का मुर्रा भैंसा 'अर्जुन राणा' और 50 लाख का मारवाड़ी नुकरा घोड़ा ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. मेरठ किसान मेले में उन्नत नस्ल के पशुओं का प्रदर्शन।

  2. 80 लाख रुपये का मुर्रा भैंसा 'अर्जुन राणा' बना आकर्षण।

  3. 50 लाख रुपये का मारवाड़ी नुकरा घोड़ा भी रहा चर्चा में।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में चल रहे अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी में उन्नत नस्ल के पशुओं और आकर्षक कद-काठी वाले घोड़ों ने लोगों का ध्यान खींचा। सफेद और हल्के गुलाबी रंग के मारवाड़ी नुकरा घोड़े की चाल और शारीरिक सौष्ठव भी आकर्षण का केंद्र रहा।

15.80 क्विंटल वजनी मुर्रा नस्ल के भैंसा अर्जुन राणा को देखने के लिए पशुपालकों की भीड़ जुटी रही। लोगों ने इन पशुओं के मालिकों से इनकी नस्ल, खुराक और विशेषताओं की जानकारी ली।शामली निवासी पशुपालक डा. बबलू अपने पांच वर्षीय मुर्रा भैंसा अर्जुन राणा को लेकर मेले में पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि इस भैंसे की कीमत करीब 80 लाख रुपये है।

यह 12 से अधिक प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुका है। इस भैंसे का सीमन लेने के लिए विभिन्न राज्यों के पशुपालक उनके फार्म पर आते हैं। इससे प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये की आमदनी होती है। गौरतलब है कि मुर्रा नस्ल की भैंसें बेहतर दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं और प्रतिदिन 20-25 लीटर तक दूध देती हैं।

मारवाड़ी नुकरा नस्ल का घोड़ा बना मेले की शान

मुजफ्फरनगर निवासी देव सहरावत का चार वर्षीय सफेद रंग का मारवाड़ी नुकरा नस्ल का घोड़ा भी मेले में आकर्षण का केंद्र रहा। करीब 350 किलो वजनी और 64 इंच ऊंचे इस घोड़े ने 10 प्रतियोगिताएं जीती हैं। देव ने बताया कि वह घोड़े को शादी समारोह, पार्टी या अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं भेजते। यह केवल पशु प्रतियोगिताओं में ही शामिल होता है।

वह सीमन नहीं बेचते, लेकिन 7,100 रुपये में घोड़ी को क्रास (ब्रीडिंग) कराते हैं। उनका दावा है कि इस घोड़े की कीमत 50 लाख रुपये लग चुकी है। कृषि विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डा. आरएस सेंगर का कहना है कि मेले में किसी पशु की कीमत नहीं आंकी जाती।

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पशु प्रदर्शनी में नस्ल, कद-काठी और विशेषताओं के आधार पर पशुओं को पुरस्कृत किया जाता है। नस्ल, सीमन की बिक्री आदि के आधार पर पशुपालक पशुओं की कीमत खुद ही आंक लेते हैं। उन्नत और उम्दा नस्ल के भैंसा समेत अन्य पशुओं का सीमन महंगा बिकता है।

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