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शिकागो से गिरिराजजी पहुंचे NRI भक्त, दंडवती परिक्रमा लगाई; श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर का लिया संकल्प

Published: Sat, 10 Oct 2026 03:27 PM (IST)Updated: Sat, 10 Oct 2026 03:47 PM (IST)

प्रवासी भारतीय प्रशांत त्यागी ने शिकागो से आकर 11वीं बार गिरिराजजी की दंडवती परिक्रमा की। उन्होंने विश्व शांति, भारत की ...और पढ़ें

गिरिराज तलहटी में शिकांगो से आए प्रशांत त्यागी का पटका पहनाकर और साफा बांधकर स्वागत करते संत महात्मा। फोटो जागरण

गिरिराज तलहटी में शिकांगो से आए प्रशांत त्यागी का पटका पहनाकर और साफा बांधकर स्वागत करते संत महात्मा। फोटो जागरण 

HighLights

  1. शिकागो के प्रशांत त्यागी ने 11वीं बार की दंडवती परिक्रमा।

  2. विश्व शांति, भारत समृद्धि, कृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण की कामना।

  3. गिरिराज तलहटी में संतों ने किया NRI भक्त का सम्मान।

संवाद सूत्र, गोवर्धन (मथुरा)। सात समंदर पार शिकागो में रहकर भी दिल में ब्रज की भक्ति और गिरिराजजी के प्रति अटूट श्रद्धा संजोए प्रशांत त्यागी को एक बार फिर गोवर्धन की धरा खींच लाई। विश्व शांति, भारत की सुख-समृद्धि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की कामना लेकर पहुंचे प्रवासी भारतीय प्रशांत त्यागी ने 11वीं बार गिरिराजजी की दंडवती परिक्रमा कर अपनी आस्था अर्पित की।

गिरिराज तलहटी में संत-महात्माओं ने पटका पहनाकर और साफा बांधकर उनका सम्मान किया। उनकी साधना में आराध्य के प्रति समर्पण के साथ विश्व कल्याण की कामना भी झलकी। 

संतों ने पटका पहनाकर और साफा बांधकर किया सम्मान

विदेश की धरती पर रहने के बावजूद मूलरूप से बागपत के रहने वाले प्रशांत त्यागी का ब्रज और सनातन परंपरा से जुड़ाव बरकरार है। गिरिराजजी की शरण में पहुंचकर उन्होंने दंडवती परिक्रमा का संकल्प पूरा किया और प्रभु के चरणों में समूचे विश्व के मंगल की प्रार्थना की। उनकी कामना रही कि दुनिया में शांति स्थापित हो, भारत निरंतर उन्नति के पथ पर आगे बढ़े और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प साकार हो। 11वीं बार दंडवती परिक्रमा करना उनकी निरंतर साधना और गिरिराजजी के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक बना।

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महामंडलेश्वर कृष्णानंदजी महाराज ने कहा कि भक्ति और समर्पण की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। विदेश में रहकर भी आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े श्रद्धालु भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान हैं।

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