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पराली जलाने में उत्तर प्रदेश का मथुरा अव्वल, अगैती धान की खेती बनी वजह

Published: Mon, 05 Oct 2026 10:17 AM (IST)

मथुरा जिला इस साल भी पराली जलाने की घटनाओं में प्रदेश में पहले स्थान पर है, जहां अब तक 14 ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. मथुरा पराली जलाने में प्रदेश में पहले स्थान पर, 14 घटनाएं दर्ज।

  2. अगैती धान की खेती पराली जलाने का मुख्य कारण बनी।

  3. कृषि विभाग पराली प्रबंधन हेतु किसानों को जागरूक कर रहा।

जागरण संवाददाता, मथुरा। पराली जलाने की घटनाओं में इस साल भी मथुरा जिला प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक पराली जलाने की 14 घटनाएं दर्ज की गई हैं। दूसरे स्थान पर अलीगढ़ है, जहां 11 घटनाएं सामने आई हैं।
पराली प्रबंधन अभियान के शुरुआती दौर में मथुरा का शीर्ष पर आने के पीछे मुख्य कारण जिले में धान की अगैती खेती है। जिले में धान की बोआई और कटाई जल्दी होती है। इसलिए पराली जलाने की घटनाएं भी जल्दी सामने आती हैं। कृषि विभाग के सूत्रों के मुताबिक 25 अक्टूबर के बाद जिले में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से कमी आती है।

धान का कुल रकबा एक लाख सात हजार हेक्टेअर

अभियान के अंतिम दौर तक मथुरा टॉप-10 की सूची से बाहर हो जाता है। पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड भी यही दिखाता है। अगैती खेती के कारण शुरुआत में मामले ज्यादा आते हैं, बाद में दूसरी फसल की बोआई के कारण नियंत्रण हो जाता है। जिले में धान का कुल रकबा एक लाख सात हजार हेक्टेयर है। इसमें से अधिकांश क्षेत्रों में हार्वेस्टर से कटाई होती है, जिससे खेत में पराली बच जाती है।

अगैती खेती के कारण पराली प्रबंधन अभियान की शुरूआत में बढ़े आंकड़े

किसान अगली फसल की तैयारी के लिए पराली में आग लगा देते हैं। कृषि विभाग द्वारा पराली प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

जिला कृ़षि अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बताया कि सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और बेलर मशीनों पर अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही पराली से खाद और भूसा बनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

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सभी एसडीएम और कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पराली जलाने वालों पर जुर्माना और कार्रवाई की जाए। कहा कि सैटेलाइट से निगरानी जारी है और हर घटना पर टीम मौके पर भेजी जा रही है।

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डीएम, सीपी सिंह।