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दिव्यांगों और बुजुर्गों को मुफ्त सफर, मथुरा के ई-रिक्शा चालक लोकेश की अनोखी पहल

Published: Sun, 27 Sep 2026 09:51 AM (IST)

मथुरा के एक ई-रिक्शा चालक लोकेश दिव्यांगों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को मुफ्त सफर कराते हैं, ...और पढ़ें

गोविंदपुर निवासी लोकेश का ई-रिक्शा।

गोविंदपुर निवासी लोकेश का ई-रिक्शा।

HighLights

  1. मथुरा के लोकेश दिव्यांगों और बुजुर्गों को मुफ्त ई-रिक्शा सेवा देते हैं

  2. ई-रिक्शा पर पंफलेट लगाकर मुफ्त सेवा की जानकारी देते हैं

  3. आगरा के गुरु राजेंद्र की प्रेरणा से यह नेक कार्य शुरू किया

जागरण संवाददाता, मथुरा। रोजी-रोटी के लिए ई-रिक्शा चलाने वाले एक चालक ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। सड़क पर दिखने वाले दिव्यांगों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों से वह किराया नहीं लेता है। वह उन्हें पूरी तरह गंतव्य तक निश्शुल्क सफर कराते हैं। खास बात है कि उन्होंने अपने ई-रिक्शा पर पंफलेट भी लगवा रखे हैं, ताकि जरूरतमंद लोग इस सुविधा की जानकारी ले सकें। लोकेश की इस पहल से प्रेरित होकर दूसरे ई-रिक्शा चालक भी बदलाव की राह पर आगे बढ़ रहे

हाईवे थाना क्षेत्र के गोविंदपुर निवासी लोकेश ने अपने काम को सेवा से जोड़कर अलग पहचान बना रहे हैं। वह दिव्यांग और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों से किराया नहीं लेते है। उनका मानना है कि जिन लोगों को चलने-फिरने में परेशानी होती है या जो उम्रदराज हैं, उनके लिए थोड़ी मदद भी बड़ी राहत बन सकती है।

आगरा के गुरु राजेंद्र की सेवा भावना से लोकेश को मिली प्रेरणा

लोकेश ने अपनी इस पहल को केवल व्यक्तिगत व्यवहार तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने अपने ई-रिक्शा पर पंफलेट लगवा रखे हैं, जिसमें दिव्यांगों और बुजुर्गों को निशुल्क सफर कराने की जानकारी दी गई है। इससे जरूरतमंद यात्रियों को भी पता चल जाता है कि उन्हें किराया देने की जरूरत नहीं है।

लोकेश बताते हैं कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान से ज्यादा संतोष मिलता है। इस नेक पहल के पीछे उन्हें आगरा के खेरिया मोड़ निवासी गुरु राजेंद्र से प्रेरणा मिली।

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बोले, कमाई से ज्यादा सुकून देता है जरूरतमंदों को मुफ्त सफर कराना

राजेंद्र की सेवा भावना से प्रभावित होकर लोकेश ने भी अपने स्तर पर यह शुरुआत की। अब उनके व्यवहार को देखकर कुछ अन्य ई-रिक्शा चालक भी जरूरतमंद बुजुर्गों और दिव्यांगों की मदद के लिए आगे आने लगे हैं।

लोकेश का कहना है कि समाज में बदलाव केवल बड़ी घोषणाओं से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी मानवीय पहल से आता है। उनका उद्देश्य किसी प्रचार या प्रशंसा के बजाय जरूरतमंद लोगों को सहारा देना है।

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