लेजर लाइट, लाठी-डंडे और हाथाें में गुलेल से होगी राष्ट्रपति के चश्मे की सुरक्षा; पल भर में उतारकर ले जाते हैं वृंदावन के बंदर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के वृंदावन और गोवर्धन दौरे के दौरान उनके चश्मे को बंदरों से बचाने के लिए विशेष इंतजाम ...और पढ़ें

झपट्टामार बंदर। फाइल राष्ट्रपति मुर्मू के वृंदावन दौरे पर बंदरों से चश्मा बचाने की खास तैयारी

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जागरण संवाददाता, मथुरा। आपने झपट्टा मारकर आंखों से चश्मा निकालने वाले वृंदावन के बंदरों के बारे में सुना होगा। यह शरारती बंदर अब अधिकारियों की परेशानी का कारण बन गए हैं। तीन दिवसीय प्रवास पर आ रहीं राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु का काला चश्मा बंदरों से बचाने की कवायद में अधिकारियों की नींद उड़ी है।
बंदर से महामहिम का चश्मा बनाने के लिए गुलेल और लाठी-डंडे से लैस वन विभाग के कर्मचारी तैनात होंगे। उन्हें डराने के लिए लंगूरों के स्टेच्यू भी लगाए जाएंगे।
30 वन कर्मियों की टीम गुलेल लेकर वृंदावन व गोवर्धन में होगी तैनात
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु तीन दिवसीय प्रवास पर 19 मार्च को मथुरा आ रही हैं। वह वृंदावन के प्रमुख मंदिरों और स्थलों का दौरा करने के साथ ही रामकृष्ण मिश्रन सेवाश्रम चैरिटेबल हास्पिटल के नए कैंसर ब्लाक का लोकार्पण करेंगी। 21 मार्च को वह 21 किमी में विराजे गोवर्धन पर्वरत की भी गोल्फ कोर्ट से परिक्रमा लगाएंगी।
वृंदावन के बंदर बेहद चतुर हैं। झपट्टा मारकर किसी का भी पलक झपकते चश्मा पार कर देते हैं फिर चश्मा तभी वापस मिलता है, जब उसके बदले उन्हें फ्रूटी का पैकेट ''रिश्वत'' में दिया जाता है।
तीन दिन तक ब्रज में राष्ट्रपति करेंगी प्रवास
अब राष्ट्रपति आ रही हैं, तो उनका काला चश्मा बचाना भी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। वृंदावन और गोवर्धन के बंदर बाहुल्य क्षेत्रों में गुलेल और लाठी-डंडे से लैस वन विभाग के तीस कर्मचारियों की टीम लगेगी। बंदर देखते ही वह गुलेल से उन्हें भगाने की कोशिश करेंगे। जिन क्षेत्रों में बंदर काफी अधिक हैं, वहां आठ कर्मचारी ड्यूटी देंगे, सामान्य संख्या वाले क्षेत्रों में तीन कर्मचारी। इन कर्मचारियों के पास लाल और हरे रंग की लेजर लाइट भी होंगी, जरूरत पर बंदर भगाने के लिए इनका भी उपयोग होगा।
लंगूर के स्टेच्यू भी लगाए जाएंगे
कर्मचारियों के साथ ही एक और काम किया जा रहा है। यह है लंगूर के स्टेच्यू लगाने का। जगह-जगह लंगूर के स्टेच्यू भी लगाए जाएंगे, जिससे बंदर उन्हें देखकर पास न आएं। दरअसल, पहले वीआईपी के दौरे पर कुछ प्रशिक्षकों को लंगूर के साथ तैनात किया जाता था। लंगूर को देखकर बंदर पास नहीं आते। लेकिन वाइल्ड लाइफ के नियमों के मुताबिक, यह ऐसा करना प्रतिबंधित है, ऐसे में अब लंगूर का उपयोग नहीं होता है। उनके स्थान पर स्टेच्यू बनाए जाएंगे।
कोविन्द का चश्मा बचाने को लगाए थे लंगूर
27 जून 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द वृंदावन आए, ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन के साथ ही कई अन्य स्थानों पर गए। तब बंदरों से उनका चश्मा बचाने के लिए वन विभाग ने लंगूर तैनात किए, कर्मचारी भी गुलेल के साथ लगाए गए।
एक घंटे तक चश्मा लेने को डीएम की कवायद
अगस्त 2022 में मथुरा के तत्कालीन डीएम नवनीत चहल वृंदावन के दौरे पर थे। तभी उनका चश्मा बंदर ने निकाल लिया। एक घंटे तक डीएम ने बंदर से चश्मा लेने की कवायद की। फिर फ्रूटी देने के बाद ही बंदर ने चश्मा वापस किया।
