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ब्रजभाषा के पारंपरिक शब्दों को बचाने के लिए बनेगा शब्दकोश, वृंदावन शोध संस्थान और जीएलए विवि की बड़ी पहल

Published: Sat, 24 Oct 2026 02:05 PM (IST)

वृंदावन शोध संस्थान और जीएलए विश्वविद्यालय ब्रजभाषा के पारंपरिक शब्दों को सहेजने के लिए एक उन्नत शब्दकोश तैयार कर रहे ...और पढ़ें

मथुरा: वृंदावन शोध संस्थान। फोटो - संस्थान द्वारा

मथुरा: वृंदावन शोध संस्थान। फोटो - संस्थान द्वारा

HighLights

  1. वृंदावन शोध संस्थान, जीएलए विश्वविद्यालय मिलकर बना रहे ब्रजभाषा शब्दकोश।

  2. ब्रजभाषा की समृद्ध शब्द संपदा को संरक्षित करना मुख्य उद्देश्य।

  3. शब्दकोश निर्माण में दो से ढाई वर्ष का समय लगेगा।

राकेश शर्मा, मथुरा। आधुनिकीकरण के दौर में ब्रजभाषा की समृद्ध शब्द संपदा को सहेजने के लिए वृंदावन शोध संस्थान ने पहल की है। जीएलए विश्वविद्यालय के सहयोग से ब्रजभाषा का उन्नत शब्दकोश तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ब्रज के पारंपरिक शब्दों को संरक्षित कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है, ताकि बदलती जीवनशैली और अंग्रेजी के बढ़ते प्रयोग के बीच क्षेत्र की भाषाई विरासत सुरक्षित रह सके। इसके लिए शब्द संकलन, तकनीकी समिति और परामर्शदात्री समिति भी गठित की गई है। इसे तैयार करने में करीब दो से ढाई वर्ष का समय लगेगा।

वृंदावन शोध संस्थान ने जीएलए विश्वविद्यालय के सहयोग से शुरू की पहल

ब्रजभाषा पहले भारतवर्ष के बड़े भाग कश्मीर से लेकर केरल तक बोली और समझी जाती थी। अब ब्रजभाषा का दायरा सिमटता जा रहा है। ब्रजभाषा में साहित्य सृजन भी बहुत सीमित हो गया है। इसका अस्तित्व बचाने और पुन:प्रतिष्ठा के लिए वृंदावन शोध संस्थान ब्रजभाषा शब्दकोश पर काम कर रहा है। ब्रजभाषा शोध पीठ की स्थापना के लिए जीएलए विश्वविद्यालय के साथ भी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

तीन समितियां भी की गईं गठित

संस्थान के निदेशक राजीव द्विवेदी बताते हैं कि अब तक ब्रजभाषा के तीन शब्दकोश सामने आए हैं, लेकिन हर एक में कोई न कोई कमी है। ब्रजभाषा का उन्नत शब्दकोश तैयार करने में इन सबको स्कैन किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन सा शब्द कोश से बाहर रह गया है और कौन सा शब्द गलत तरीके से भाषा में जुड़ गया है।

दो से ढाई वर्ष में तैयार होगा शब्दकोश

वरिष्ठ शोध प्रकाशन सहायक करुणेश उपाध्याय ने बताया कि शब्दकोश निर्माण में शब्द संकलन समिति, तकनीकी समिति और परामर्शदात्री समिति का गठन पिछले माह कर दिया गया है। प्रदेश के अलावा राजस्थान और दिल्ली के साहित्यकारों वाली इन समितियों ने काम शुरू कर दिया है।

इन शब्दकोशों से लिए जा रहे शब्द

  • ब्रज भाषा साहित्य कोश -विद्यानिवास मिश्र, उप्र हिंदी संस्थान द्वारा संपादित।
  • ब्रजभाषा सूर कोश -श्रीनारायण चतुर्वेदी, इटावा द्वारा संपादित।
  • कृषक शब्दावली कोश -अंबाप्रसाद सुमन, अलीगढ़ द्वारा संपादित।

इन समितियों में इन्हें मिला स्थान

ब्रजभाषा शब्द संकलन समिति में प्रो. विद्योतमा मिश्रा, प्रो माधव हाड़ा, डॉ. नटवर नागर, डॉ विजेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. संध्या द्विवेदी, डॉ. आशुतोष कुमार, डॉ. नृत्य गोपाल, डॉ. अनुपम श्रीवास्तव हैं। परामर्शदात्री समिति में डा. सूर्यप्रसाद दीक्षित, विष्णु के. आचार्य, डॉ. अभिनव तिवारी और अखिलेश व्यास हैं। तकनीकी समिति में पद्मश्री ऊषा यादव, डॉक्टर जगदीश व्योम, डॉ. रामसनेहीलाल यायावर और डॉ. शेफाली चतुर्वेदी हैं।

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