यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 05, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Mainpuri Bypoll: यादवों के गढ़ में अजेय रही है सपा, मुलायम सिंह के बाद 'किला' बचाने की चुनौती
Mainpuri Bypoll सूरमाओं का समर-लगातार नौ चुनाव से मिल रही जीत गढ़ को बचाए रखने की है चुनौती। मैनपुरी में ...और पढ़ें

मैनपुरी, जागरण टीम। मैनपुरी का राजनीतिक अखाड़ा लोकसभा उप चुनाव के लिए फिर तैयार है। समाजवादी खेमे के लिए बीते 26 साल से सर्वाधिक सुरक्षित इस सीट को मुलायम सिंह यादव का गढ़ कहा जाता था। पहलवान रह चुके सपा संरक्षक मुलायम अपने हर विरोधी को पटखनी दी थी। परंतु अब उनके निधन के बाद सपा के सामने अपने इस गढ़ को बचाए रखने की चुनौती है। बीते कुछ सालाें में भाजपा की बढ़त इसका स्पष्ट संकेत दे रही है। ऐसे में इस बार का चुनावी दंगल सपा और भाजपा के बीच सीधे मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है।
मतदाताओं ने नेताओं पर जताया भरोसा
ईशन और काली नदी की मौजूदगी वाली मैनपुरी मयन और च्यवन, जैसे ऋषियों की तपोस्थली रही है। ऐतिहासिक ग्रांड ट्रक रोड भी यहां से होकर गुजरती है। स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र की यात्रा आरंभ हुई तो मतदाताओं का प्यार राजनेताओं की निष्ठा में बदल गया। मतदाताओं ने नेताओं पर एक नहीं कई-कई बार भरोसा जताया। क्षेत्रीय दलों के उदय के बाद जातीय समीकरणों की बयार बही तो यह लोकसभा क्षेत्र सपा के राजनीतिक गढ़ के रूप में प्रख्यात हो गया। इसका सबसे बड़ा कारण, यादव मतदाताओं की बहुलता था। यादवों के साथ अन्य जातियों का साथ भी सपा को खूब मिला।
भाजपा ने किया संगठन में विस्तार
इस बार परिस्थितियां अलग हैं। इनमेें सबसे महत्वपूर्ण है, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का न होना। मुलायम सिंह यादव का पूरे लोकसभा क्षेत्र में जबर्दस्त समर्थन हुआ करता था। अब सपा के सामने उसी समर्थन को बरकरार रखना, सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरी तरफ पूर्व में भाजपा का संगठन बहुत मजबूत नहीं था।
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करहल, किशनी और जसवंतनगर विधानसभाओं के तो सैकड़ों बूथों पर तो एक कार्यकर्ता तक नहीं था। परंतु वर्ष 2014 में केंद्र की सरकार और फिर 2017 में प्रदेश में सरकार बनने के बाद संगठन का जबर्दस्त विस्तार हुआ है। वर्तमान में हर बूथ पर भाजपा की पूरी मौजूदगी है। बीते चुनावों में उसका मत प्रतिशत भी बढ़ा है। ऐसे में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।
जीत का रिकार्ड मुलायम के नाम
इस सीट पर जीत का रिकार्ड मुलायम सिंह यादव के ही नाम है। मुलायम सिंह यादव यहां पांच बार सांसद बन चुके हैं। उनके बाद सबसे ज्यादा जीत बलराम सिंह यादव के नाम हैं। बलराम सिंह यादव एक बार कांग्रेस की टिकट पर और दो बार सपा की टिकट पर चुनाव जीते थे।
ऐसे बढ़ी सपा की ताकत
पहला चुनाव जीतने के बाद सपा ने यहां की जनता में अपने प्रति जबर्दस्त विश्वास जगाया। 1996 के चुनाव में सपा को 42.77 फीसद वोट मिले थे। इसके बाद के चुनाव में यह आंकड़ा 41.69 फीसद रह गया। इसके बाद 99 के चुनाव में 63.96 फीसद, 2004 के चुनाव में 62.64 फीसद, 2004 उपचुनाव में 56.44, 2014 के उप चुनाव में 59.63 फीसद वोट मिले। परंतु 2014 के उप चुनाव में फिर उछाल आया और सपा को 64.89 फीसद वोट हासिल हुए। वर्ष 2019 के चुनाव में भी सपा को 53.65 फीसद वोट हासिल हुए थे।
भाजपा के लिए बड़ी है चुनौती
भाजपा पहली बार 1991 में मैदान में उतरी थी, तब सामने सपा नहीं थी। भाजपा प्रत्याशी दूसरे स्थान तक पहुंचा था। इसके बाद हुए आठ चुनावों में पार्टी पांच में दूसरे और तीन में तीसरे स्थान पर ही। इन नौ चुनावों में पार्टी अधिकतम 40.06 फीसद वोट भी हासिल कर सकी है।
- वर्ष 1991 में भाजपा को 26.57 फीसद वोट मिले थे।
- 1998 में 40.06 फीसद वोट मिले।
- 2004 के उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी 2.6 फीसद वोटों तक ही सिमट गया था।
- 2014 के उपचुनाव की बात करें तो भाजपा प्रत्याशी को 33 फीसद वोट मिले थे।
- जबकि बीते उपचुनाव में भाजपा को 44 फीसद वोट प्राप्त हुए थे।
यहां हमेश गौण ही रहे मुद्दे
मैनपुरी लोकसभा सीट की बात करें तो यहां मुद्दे हर चुनाव में गौण ही रहे। न तो सियासी दलों ने जनता को वादे करने की फिक्र की न ही मतदाता सही तरीके से अपने मुद्दाें को उठा सके। वैसे यहां सबसे बड़ा मुद्दा नए उद्योगों की स्थापना का है। जिले कोई भी प्रमुख उद्योग नहीं है। पूर्व में 100 से अधिक राइस मिले हुआ करती थीं, जो अब गिनती की रह गई हैं। रेल सुविधाओं का विकास भी यहां की पुरानी मांग रहा है। स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। जनता की मांग के बाद यहां कैंसर यूनिट की स्थापना तो हो चुकी है, परंतु सालों से इसके शुरू होने का इंतजार है।
पांच हैं विधानसभाएं
- मैनपुरी विधानसभा
- करहल विधानसभा
- किशनी विधानसभा
- भोगांव विधानसभा
- जसवंत नगर विधानसभा (इटावा)
कब कौन जीता
चुनाव, विजेता
1952, बादशाह गुप्ता, कांग्रेस 1957, बंशीदास धनगर, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी1962, बादशाह गुप्ता, कांग्रेस 1967, महाराज सिंह, कांग्रेस 1971, महाराज सिंह, कांग्रेस 1977, रघुनाथ सिंह वर्मा, भारतीय लोकदल 1980, रघुनाथ सिंह वर्मा, जनता पार्टी सेकुलर1984, चौ. बलराम सिंह, कांग्रेस1989, उदयप्रताप सिंह, जनता दल1991, उदयप्रताप सिंह, जनता पार्टी1996, मुलायम सिंह यादव, सपा1998, बलराम सिंह, सपा1999, बलराम सिंह, सपा2004, मुलायम सिंह यादव, सपा2004 उप चुनाव, धर्मेंद्र यादव, सपा2009, मुलायम सिंह यादव, सपा2014, मुलायम सिंह यादव, सपा2014 उप चुनाव, तेज प्रताप सिंह यादव, सपा 2019, मुलायम सिंह यादव, सपा