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परंपरागत खेती छोड़ मैनपुरी के किसान ने फूलों की नर्सरी से बदली तकदीर, लाख में पहुंची कमाई

Published: Wed, 04 Nov 2026 11:42 AM (IST)

मैनपुरी के वनकिया गांव के किसान रामचंद्र शाक्य ने परंपरागत खेती छोड़कर दो बीघा जमीन पर फूलों की हाइब्रिड नर्सरी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. किसान रामचंद्र शाक्य ने फूलों की नर्सरी शुरू की।

  2. दो बीघा जमीन से सालाना एक लाख कमाते हैं।

  3. परंपरागत खेती छोड़ नए विकल्प अपनाने की प्रेरणा।

जागरण संवाददाता, मैनपुरी। खेती में कुछ अलग करने का जज्बा हो तो छोटी सी जमीन भी अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है। परंपरागत फसलों में बढ़ती लागत और मेहनत के बीच विकासखंड बेवर के गांव वनकिया निवासी किसान रामचंद्र शाक्य ने कमाई का अलग रास्ता चुना है।

उन्होंने गेहूं, धान जैसी परंपरागत फसलों को छोड़कर अपने दो बीघा खेत में फूलों की हाइब्रिड नर्सरी तैयार करना शुरू कर दिया।

करीब 40 साल के अनुभव से उन्होंने इस काम में ऐसी पकड़ बनाई है कि सभी खर्च निकालने के बाद सालाना एक लाख रुपये की शुद्ध बचत कर लेते हैं।

शुरुआत में परंपरागत खेती की थी

रामचंद्र शाक्य बताते हैं कि शुरुआत में उन्होंने परंपरागत खेती की थी, लेकिन इससे अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद उन्होंने फूलों के पौधों की नर्सरी तैयार करने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे अनुभव बढ़ा तो नर्सरी के काम में भी विस्तार किया। अब उनका पूरा ध्यान फूलों की हाइब्रिड पौध तैयार करने पर रहता है। दो बीघा जमीन में वह अलग-अलग किस्मों के पौधे तैयार करते हैं, जिन्हें खरीदने के लिए लोग भी पहुंचते हैं।

नर्सरी के काम में जरूरी है नियमित देखभाल 

किसान का कहना है कि नर्सरी के काम में नियमित देखभाल और पौधों की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। चार दशक के अनुभव ने उन्हें इस काम में दक्ष बना दिया है। उनका मानना है कि किसान परंपरागत खेती के साथ नए विकल्प अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।

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