महराजगंज में घर के आंगन में पत्नी का अंतिम संस्कार, कबीर पंथ की परंपरा पर अड़ा पति; मचा बवाल
एक पति ने अपनी मृत पत्नी के शव को कबीर पंथ की परंपरा का हवाला देते हुए घर के आंगन ...और पढ़ें

:कबीरपंथ परंपरा का हवाला देते हुए अपने निर्णय पर अडिग रहा पति। जागरण
HighLights
पति ने पत्नी का शव घर के आंगन में दफनाया।
कबीर पंथ की परंपरा का हवाला दिया पति ने।
ग्रामीणों ने आपत्ति जताई, पुलिस ने परंपरा बताया।
जागरण संवाददाता, नौतनवा, (महराजगंज)। पति ने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद उसके शव को घर के आंगन में दफना दिया, जिससे गांव में असहज स्थिति उत्पन्न हो गई। ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताते हुए पुलिस को सूचना दी। पति ने कबीर पंथ की धार्मिक मान्यता का हवाला देते हुए अपनी जमीन पर ऐसा करने की बात कही है।
प्यारे ज्ञान दास पिछले छह वर्षों से सोनौली थाना क्षेत्र के हरदीडाली में पत्नी 50 वर्षीय कलावती और बच्चों के साथ रह रहे हैं। मंगलवार दोपहर को कलावती की अचानक तबीयत बिगड़ने से मृत्यु हो गई। पति ने बताया कि वे कबीर पंथ की संत परंपरा का पालन करते हैं,जिसके अनुसार उन्होंने पत्नी का शव अपनी खरीदी हुई भूमि में दफनाया है।
ग्रामीणों की आपत्ति के बाद गांव के प्रशासक गोपाल नारायण चौधरी मौके पर पहुंचे और शव को आबादी से अलग स्थान पर दफनाने के लिए समझाया, लेकिन पति अपनी बात पर अड़े रहे। सोनौली पुलिस भी मौके पर पहुंची। हरदीडाली के पूर्व प्रधान कृष्ण कुमार ने बताया कि आंगन में शव दफनाने से ग्रामीणों में भय व्याप्त है।
ग्रामीण सुनील, दिनेश पासवान, श्रीकिशुन, अनिल और दयाशंकर ने आबादी के बीच शव दफनाने पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की पुलिस-प्रशासन को जांच करनी चाहिए।
प्यारे ज्ञान दास ने कहा कि उन्होंने कबीर पंथ की संत परंपरा के अनुसार पत्नी के शव को दफनाया है और उनकी जमीन खरीदी हुई है, इसलिए उन्होंने किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। वहीं ग्रामीणों ने शव दफनाने की प्रक्रिया, स्थान की स्थिति और इसके लिए आवश्यक अनुमति को लेकर सवाल उठाया है।
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थानाध्यक्ष सोनौली विशाल शुक्ला ने बताया कि कबीर पंथ में इस तरह से शव दफनाने की पंरपरा है। 13 दिन पूजा के बाद वहां चबूतरा बना दिया जाता है। इसमें किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।
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