महराजगंज में प्याज के दाम दोगुने, हरी सब्जियों और तेल की कीमतों में भी उछाल
सब्जियों और खाद्य तेलों के लगातार बढ़ते दामों ने लोगों के रसोई बजट को बिगाड़ दिया है। महराजगंज में प्याज ...और पढ़ें

30 से 60 रुपये किलो पहुंचा प्याज, लहसुन भी 220 रुपये तक उछला। जागरण
HighLights
महराजगंज में प्याज की कीमत एक महीने में दोगुनी हुई।
लहसुन और अन्य हरी सब्जियों के दाम भी काफी बढ़े।
बारिश से आवक प्रभावित होने से महंगाई का असर।
जागरण संवाददाता, निचलौल। सब्जियों के लगातार बढ़ते दाम ने लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। एक माह के भीतर प्याज की कीमत दोगुणा हो गई है। वहीं, लहसुन समेत कई हरी सब्जियों के भाव में भी तेजी आई है। बारिश के कारण मंडियों में सब्जियों की आवक प्रभावित होने से फुटकर बाजार में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
सब्जियों के साथ खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से परिवारों का घरेलू खर्च और बढ़ गया है। एक माह पहले 30 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह एक सप्ताह पहले 140 रुपये किलो बिक रहा लहसुन अब 200 से 220 रुपये किलो तक पहुंच गया है। परवल, टमाटर, गोभी, बैंगन समेत कई हरी सब्जियों के भाव में भी 10 से 80 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
प्याज और लहसुन का इस्तेमाल लगभग हर सब्जी व व्यंजन में होने के कारण इनके बढ़े दाम का सीधा असर रसोई के खर्च पर पड़ रहा है। सब्जी फुटकर विक्रेता रमेश कुमार ने कहा कि बाहर से आने वाली सब्जियों के दाम बढ़े हैं। वर्षा के कारण मंडियों में हरी सब्जियों की आवक कम होने से कीमतों में तेजी आई है। गोरखपुर, महराजगंज और निचलौल मंडी से सब्जियां महंगे दाम पर मिल रही हैं। परिवहन व अन्य खर्च जुड़ने के बाद फुटकर बाजार में कीमत और बढ़ जाती है।
तेल ने भी बढ़ाया खर्च
सब्जियों के अलावा सरसों तेल, रिफाइंड, चीनी समेत अन्य खाद्य तेलों के दाम में भी तेजी आई है। इससे पहले से महंगाई का सामना कर रहे परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। जिससे माध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को महंगाई का मार झेलना पड़ रहा है।
सब्जियों के दाम लगातार बढ़ने से महीने का बजट बिगड़ रहा है। पहले जहां आसानी से कई तरह की सब्जियां खरीदी जाती थीं, वहीं अब कीमत देखकर मात्रा कम करनी पड़ रही है।
- वंदना वर्मा, लोहियानगर, निचलौल
प्याज, लहसुन और हरी सब्जियों के साथ तेल के दाम बढ़ने से रसोई का खर्च काफी बढ़ गया है। आमदनी सीमित होने के कारण अब जरूरी सामान की खरीदारी भी सोच-समझकर करनी पड़ रही है।
- संतोष लाल श्रीवास्तव, घोड़हवा, निचलौल
