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सोहगीबरवा में घुसा बाढ़ का पानी, खोले गए वाल्मीकिनगर बैराज के सभी फाटक

Published: Sun, 27 Sep 2026 01:56 PM (IST)

नारायणी नदी में जलस्तर बढ़ने से महराजगंज के सोहगीबरवा क्षेत्र में बाढ़ का पानी गांवों में घुस गया है, जिससे ...और पढ़ें

नारायणी में बढ़कर 3.00 लाख क्यूसेक हुआ जलप्रवाह। जागरण

 नारायणी में बढ़कर 3.00 लाख क्यूसेक हुआ जलप्रवाह। जागरण

HighLights

  1. नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ा, सोहगीबरवा में बाढ़ का पानी

  2. वाल्मीकिनगर बैराज के सभी फाटक खोले गए, 3 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज

  3. प्रशासन ने बचाव कार्य तेज किया, SDRF-NDRF टीमें तैनात

जागरण संवाददाता, महराजगंज। नेपाल से आने वाली नारायणी नदी में लगातार बढ़ते जलप्रवाह के बीच सोहगीबरवा क्षेत्र में बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंच गया है। भोथहा और शिकारपुर गांव में पानी घुसने के साथ सड़कों पर भी पानी बह रहा है, जबकि धीरे-धीरे झोपड़ियों और घरों तक पानी पहुंचने लगा है।

शनिवार शाम चार बजे वाल्मीकिनगर बैराज से 3,00,400 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। जलप्रवाह बढ़ने के साथ ही बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील गांवों में निगरानी और बचाव व्यवस्था बढ़ा दी है। पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार वर्षा के कारण नारायणी का जलप्रवाह तेजी से बढ़ा है।

गुरुवार दोपहर नदी में करीब 56 हजार क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार शाम चार बजे बढ़कर 1.21 लाख क्यूसेक और शाम पांच बजे करीब 1.29 लाख क्यूसेक पहुंच गया। शनिवार की शाम को जलप्रवाह बढ़कर तीन लाख क्यूसेक होने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने लगी।

शनिवार सुबह तहसील प्रशासन की टीम ने सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा में सायरन बजाकर ग्रामीणों को संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की। ग्रामीण जरूरी सामान और मवेशियों के चारे-पानी को सुरक्षित करने में जुटे हुए थे। इधर देखते ही देखते पानी बढ़ता गया और शाम होते-होते नदी का पानी गांव की सड़कों पर पहुंच गया और नीचले क्षेत्रों में बनी झोपड़ी में घुस गया है।

एसडीआरएफ-एनडीआरएफ की टीम तैनात
नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए एसडीएम अवनीश त्रिपाठी और तहसीलदार सोहगीबरवा पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने बताया कि राजस्व विभाग की पूरी टीम को अलर्ट किया गया है। गांव में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ ही साथ बाढ़ पीएसी की टीम तैनात है। इसके साथ ही चिकित्सकों की टीम भी गांव में पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही है।

सिंचाई खंड-दो की शाम चार बजे की बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार वाल्मीकिनगर बैराज पर अपस्ट्रीम जलस्तर 109.48 मीटर और डाउनस्ट्रीम 108.99 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का स्तर 109.670 मीटर है। वहीं रोहिन बैराज रतनपुर से 1,409 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज हुआ। त्रिमुहानी घाट पर रोहिन नदी का जलस्तर 80.61 मीटर रहा, जबकि खतरे का निशान 82.44 मीटर है। महाव नाला सात फीट पर बह रहा है, जबकि खतरे का निशान पांच फीट है।

डीएम ने तीन तहसीलों में तटबंधों व नालों का लिया जायजा, अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश
लगातार हो रही वर्षा और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने शनिवार को फरेन्दा, नौतनवां और निचलौल तहसील क्षेत्र के संवेदनशील स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने तटबंधों, नदियों और नालों की स्थिति देखने के साथ अधिकारियों से बाढ़ से निपटने की तैयारियों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीएम ने फरेन्दा क्षेत्र में राप्ती नदी के बायें तट पर स्थित बेलसर-रिंगौली तटबंध का निरीक्षण किया।

डीएम ने बाढ़ चौकियों और नावों की उपलब्धता की भी जानकारी ली। तहसील में आठ बाढ़ चौकियां हैं, और 11 गांवों में नाव व नाविक सूचीबद्ध किए गए हैं। इसके बाद नौतनवां क्षेत्र में महाव नाला का निरीक्षण किया गया, जहां पानी करीब सात फीट के स्तर पर प्रवाहित मिला। डीएम ने जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी असामान्य वृद्धि की सूचना तत्काल देने के निर्देश दिए।

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निचलौल क्षेत्र में चंदन नदी के दायें और प्यास नदी के बायें तट पर स्थित रामनगर-ठूठीबारी तटबंध का भी निरीक्षण किया गया। तटबंध की टाप और दोनों स्लोप अच्छी स्थिति में मिले तथा बोल्डर से कराए गए कटाव निरोधक कार्य प्रभावी पाए गए। डीएम ने सिंचाई विभाग को जिले की सभी नदियों और प्रमुख नालों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने तथा सूचनाएं तहसील व जिला स्तर के अधिकारियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस दौरान संबंधित एसडीएम, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता जितेंद्र कुमार पटेल, जेई और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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