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महराजगंज अमृत सरोवर घोटाला: तत्कालीन ईओ समेत तीन अधिकारियों के निलंबन की सिफारिश

Published: Fri, 11 Sep 2026 12:51 PM (IST)

महराजगंज में अमृत सरोवर निर्माण में अनियमितताओं और मनमानी की जांच के बाद जिलाधिकारी ने बड़ी कार्रवाई की है। दो ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. अमृत सरोवर में तीन किशोरों की डूबने से हुई थी मृत्यु।

  2. जांच में शासनादेश की अनदेखी और मनमानी कार्य की पुष्टि।

  3. तत्कालीन ईओ, अवर अभियंता, लिपिक के निलंबन की संस्तुति।

जागरण संवाददाता, महराजगंज। दो अगस्त को सिसवा नगर पालिका के मीराबाई नगर वार्ड स्थित निर्माणाधीन अमृत सरोवर में डूबकर हुई तीन किशोरों की मृत्यु मामले के बाद शुरू हुए कथित भ्रष्ट्राचार की जांच पूरी होने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में अमृत सरोवर निर्माण में शासनादेश का अनुपालन न करने समेत अन्य कमियों पर जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने तत्कालीन अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज, अवर अभियंता देवेंद्र कुमार और लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास को रिपोर्ट भेजी है।

संदीप कुमार सरोज वर्तमान में नौतनवा के अधिशासी अधिकारी हैं। वहीं, कार्य के दौरान तैनात रहीं तत्कालीन ईओ प्रियंका मिश्रा और वर्तमान ईओ विन्ध्यांचल से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से अमृत सरोवर का निर्माण कराया जा रहा था। दो अगस्त को इसी निर्माणाधीन अमृत सरोवर में डूबने से तीन किशोरों की मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद सिसवा कस्बा निवासी बृजेंद्र सिंह आशीष ने अमृत सरोवर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, कथित भ्रष्टाचार और एक ही योजना के तालाब पर दो टेंडर से कार्य कराने का आरोप लगाते हुए सरकारी धन के बंदरबाट का आरोप लगाया था।

घटना के तुरंत बाद संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा उसे जेल भेज दिया गया था। वहीं आरोपों की जांच के लिए जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी निचलौल, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग महराजगंज और उपायुक्त श्रम रोजगार को निर्देशित किया था। जांच कमेटी ने जांच में पाया गया कि जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों ने अमृत सरोवर योजना से संबंधित शासनादेश का पालन नहीं किया और कार्य मनमाने ढंग से कराया गया।

इसी लापरवाही को कार्रवाई का आधार बनाया गया है। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन ईओ, अवर अभियंता और लिपिक के निलंबन की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास को रिपोर्ट भेजी गई है।

एक ही तालाब पर नगर पालिका ने किए दो टेंडर
जिस अमृत सरोवर के प्रकरण में जिलाधिकारी ने कार्रवाई की है, उसी के निर्माण के नाम पर नगर पालिका ने अलग-अलग योजनाओं से दो टेंडर जारी किया था। खास बात यह है कि पहले टेंडर से कराया जा रहा निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ था, इसके बावजूद नगर पालिका ने उसी तालाब के पुनर्जीवन एवं सौंदर्यीकरण के लिए दूसरा टेंडर जारी कर दिया था। अमृत 2.0 योजना के तहत तालाब के निर्माण एवं सुंदरीकरण के लिए सात जनवरी 2025 को 1.52 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था।

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यह कार्य दीपक कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोपराइटर दीपक सिंह को मिला था। कार्य छह माह में पूरा होना था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी निर्माण अधूरा है। पहले निर्माण के अधूरा रहने के बावजूद उसी तालाब के पुनर्जीवन एवं सौंदर्यीकरण के लिए 22 जून 2026 को राज्य वित्त आयोग मद से 1.69 करोड़ रुपये का दूसरा टेंडर जारी किया गया। ऐसे में सवाल उठा कि जब मूल निर्माण पूरा नहीं हुआ था तो उसी तालाब के पुनर्जीवन के लिए दूसरी योजना से टेंडर क्यों जारी किया गया था?

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