भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी गांजा तस्करी, थाईलैंड से काठमांडू और फिर सोनौली के रास्ते भारत में हो रही एंट्री
नेपाल में भांग के सीमित उत्पादन को कानूनी छूट मिलने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर नशा तस्करों का नेटवर्क सक्रिय ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। नेपाल में भांग के उत्पादन को कानूनी रूप देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश और गंडकी प्रदेश में अगस्त 2026 में गांजे की खेती को सीमित छूट मिलने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी का नेटवर्क सक्रिय हो गया है। तस्कर भारत को बड़ा बाजार मानकर काठमांडू समेत नेपाल के विभिन्न इलाकों से गांजा और भांग की खेप महराजगंज तथा सिद्धार्थनगर के सीमावर्ती रास्तों से ला रहे हैं। यहां से इसे गोरखपुर, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब तक पहुंचाने की कोशिश होती है।
नेपाल 60 और 70 के दशक में गांजा, मारिजुआना और चरस के नशे के लिए बदनाम था। देवानंद की फिल्म ‘हरे राम-हरे कृष्णा’ भी इसी विषय पर केंद्रित थी। अंतरराष्ट्रीय दबाव में उस समय नेपाल सरकार ने नशे की खेती पर रोक लगाई थी। बाद में भांग के औषधीय, शोध और औद्योगिक उपयोग के नाम पर नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 18 मई 2025 को अदालत ने इस संबंध में आदेश दिया।
जेन जी आंदोलन के कारण बनी अस्थिरता के चलते आदेश दबा रहा। 18 महीने बाद पिछले सप्ताह जारी विस्तृत प्रति में 1976 के कानून में उल्लेखित छूट लागू करने का आदेश दिया गया। खेती की छूट केवल औषधीय और औद्योगिक उपयोग के लिए है। अनुमति वाले क्षेत्रों में गांजे में नशा पैदा करने वाले तत्व टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (टीएचसी) की मात्रा 0.3 प्रतिशत रखने का निर्देश है।
इसके बावजूद नेपाल के पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्रों, मध्य नेपाल और भारत से सटे तराई के रुपंदेही, नवलपरासी पूर्वी व पश्चिमी, कपिलवस्तु व चितवन आदि जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध खेती की जा रही है। खेती, प्रसंस्करण और भारतीय बाजार तक खेप पहुंचाने में सीमा पर सक्रिय तस्कर शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सामान्य गांजे की कीमत 15 से 20 हजार रुपये प्रति किलो है।
हाइड्रोपोनिक जैसे उच्च गुणवत्ता वाले गांजे की कीमत इससे कई गुणा अधिक है। तस्कर सोनौली, बढ़नी, ठूठीबारी, खुनुआ, बरगदवा, परसामलिक और झुलनीपुर सीमा क्षेत्रों से खेप ला रहे हैं। पगडंडियों और यात्री बसों में छिपाकर लाई गई खेप आगे दिल्ली-एनसीआर और पंजाब भेजी जाती है।
तस्करी रोकने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों ने काठमांडू में बैठक कर रणनीति बनाई है। भैरहवा के डीएसपी कृष्ण कुमार चंद के अनुसार, तस्करी रोकने के लिए निगरानी जारी है और सीमा क्षेत्र के तस्करों का विवरण तैयार किया जा रहा है।
थाईलैंड-काठमांडू-सोनौली मार्ग का इस्तेमाल
तस्कर महंगा हाइड्रोपोनिक गांजा थाईलैंड से विमान के जरिए काठमांडू और फिर सड़क मार्ग से भारत लाते हैं। 16 सितंबर को नेपाल के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने काठमांडू के सोहनाखुट्टे स्थित होटल में ठहरी म्यांमार की महिला जिन-जिन फ्यो को पकड़ा था। उसके सूटकेस से हाइड्रोपोनिक गांजा मिला। वह पैसिफिक एयरवेज की उड़ान से वियतनाम से हांगकांग होते हुए काठमांडू पहुंची थी। गिरफ्तार बरकतुल्लाह और युसुफ खान गोरखपुर के रहने वाले थे। उन्हें गांजा दिल्ली-एनसीआर पहुंचाने की जिम्मेदारी मिली थी।
इस वर्ष की प्रमुख बरामदगी
पांच नवंबर को ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के लोहरौली गांव के पास एक कार से एक क्विंटल 22 किलो 975 ग्राम गांजा बरामद हुआ और दो आरोपित गिरफ्तार किए गए। चार नवंबर को थाईलैंड से विमान के जरिए नेपाल पहुंचे दो भारतीय नागरिक त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल पर छह किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किए गए। नेपाल के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बुधवार को प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी।
17 अक्टूबर को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआइ) ने गोरखपुर-कुशीनगर मार्ग पर ट्रक से 591.3 किलोग्राम गांजा पकड़ा। इसे इस साल की सबसे बड़ी बरामदगी माना जा रहा है। 20 सितंबर को संपतिया के कंचन घाट पर पुलिस और एसएसबी ने नदी से लाया जा रहा 1.350 किलोग्राम गांजा पकड़ा।
10 जून को एसएसबी ने सोनौली सीमा पर एक नेपाली नागरिक से 2.30 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया, जिसे काठमांडू से दिल्ली ले जाया जा रहा था।सात फरवरी को भारत-नेपाल मैत्री बस की जांच में 2.862 किलोग्राम और 11 फरवरी को सोनौली सीमा पर 8.13 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा मिला।
सीमा पर निगरानी जारी है। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर चौकसी बढ़ाई गई है। पगडंडियों पर नियमित गश्त और जांच के निर्देश दिए गए हैं।
शक्ति सिंह ठाकुर, कमांडेंट, 22वीं वाहिनी, एसएसबी
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