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उत्तर प्रदेश की आंगनबाड़ी वर्कर्स को हर साल मिलेगी साड़ी, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

Published: Fri, 09 Oct 2026 03:38 PM (IST)

योगी सरकार ने प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को अब हर साल तीन साड़ियां देने का निर्णय लिया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ।

सीएम योगी आदित्यनाथ।

HighLights

  1. आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को अब मिलेंगी तीन साड़ियां।

  2. योगी कैबिनेट ने एक अतिरिक्त साड़ी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

  3. राज्य सरकार 19.02 करोड़ रुपये खर्च कर 3.80 लाख को लाभ देगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/लखनऊ। योगी सरकार ने प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को हर साल तीन साड़ियां देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

अभी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को साल में दो साड़ियां मिलती हैं। नई व्यवस्था से प्रदेश की 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। इस पर राज्य सरकार करीब 19.02 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। इनके लिए 1,90,145 कार्यकत्रियों और इतनी ही सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। सभी स्वीकृत पदों के आधार पर कुल 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को एक-एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार

वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 की वित्तीय भागीदारी वाली योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो साड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तीसरी साड़ी राज्य सरकार अपने खर्च पर देगी। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपये निर्धारित किए गए हैं। कुल अनुमानित व्यय 19,01,45,000 रुपये होगा।

नियमित इस्तेमाल और धुलाई की परेशानी होगी दूर

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा में काम करना होता है। नियमित इस्तेमाल, धुलाई, प्रतिकूल मौसम और साड़ी के अचानक गंदा या खराब होने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए एक अतिरिक्त साड़ी देने का फैसला किया गया है।

प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। इन सेवाओं के संचालन में कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की अहम भूमिका है।

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