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विवेक तिवारी हत्याकांड में आज आएगा फैसला, आठ वर्ष से न्याय की लड़ाई लड़ रहा परिवार

Published: Wed, 16 Sep 2026 05:24 PM (IST)

Vivek Tiwari Murder Case: कल्पना तिवारी ने कहा कि पति की मौत के बाद से परिवार के लिए यह लंबा ...और पढ़ें

विवेक तिवारी ( फाइल फोटो)                                                                         विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी

विवेक तिवारी ( फाइल फोटो) विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी

HighLights

  1. ऐसी सजा हो कि दोबारा पुलिसकर्मी ऐसा करने से पहले सौ बार सोचें: कल्पना तिवारी

  2. परिवार की मांग दोनों आरोपितों को फांसी नहीं तो आजीवन कारावास मिले

  3. 29 सितंबर 2018 की देर रात सिपाही प्रशांत चौधरी ने मारी थी विवेक तिवारी को गोली

जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में गोमतीनगर के बहुचर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में गुरुवार को फैसला आने की संभावना के बीच पीड़ित परिवार की निगाहें न्यायालय पर टिकी हैं।

एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि वह आठ वर्ष से न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं। अब न्यायालय से मांग है कि आरोपितों को ऐसी सजा सुनाई जाए, जिससे दोबारा कोई पुलिसकर्मी ऐसा करने से पहले सौ बार सोचे। उन्होंने कहा कि फांसी नहीं तो आजीवन कारावास की सजा जरूर मिलनी चाहिए।

कल्पना तिवारी ने कहा कि पति की मौत के बाद से परिवार के लिए यह लंबा संघर्ष रहा है। उनकी उम्मीद अब न्यायालय के फैसले पर टिकी है। उनका कहना है कि सजा ऐसी होनी चाहिए, जिससे पुलिसकर्मियों को अपने आचरण और बल प्रयोग की गंभीरता का एहसास हो और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।

बता दें कि 29 सितंबर 2018 की देर रात विवेक तिवारी सहकर्मी सना खान के साथ कार से लौट रहे थे। गोमतीनगर विस्तार में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, कार नहीं रुकी और टक्कर की स्थिति बनी। इसी दौरान प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी, जो विवेक तिवारी को लगी। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने पर उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद सना खान की तहरीर पर गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर निलंबित किया गया। जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित हुआ। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया और लखनऊ की जिला अदालत में सुनवाई शुरू हुई।

मुकदमे में गवाहों के बयान, साक्ष्य और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंतिम बहस का चरण भी पूरा हो चुका है। मिली जानकारी के मुताबिक छह अगस्त को अंतिम बहस हुई थी। अब अदालत को अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर निर्णय करना है। फैसले से पहले कल्पना तिवारी की सजा संबंधी मांग ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है।

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