यूपी के 762 नगरीय निकायों में बनेंगे ‘कपि वन’, 120 बनकर तैयार, 642 के लिए तेज हुई जमीन की तलाश
उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में बढ़ती बंदरों की समस्या से निपटने के लिए सभी 762 नगरीय निकायों में 'कपि वन' विकसित करने की तैयारी की है।

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HighLights
सभी 762 नगरीय निकायों में 'कपि वन' विकसित होंगे।
बंदरों को प्राकृतिक भोजन और आश्रय प्रदान किया जाएगा।
शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण और जैव विविधता बढ़ेगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार ने शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में बढ़ती बंदरों की समस्या से निपटने के लिए सभी 762 नगरीय निकायों में 'कपि वन' विकसित करने की तैयारी की है। सरकार ने इसके लिए वर्ष 2028 तक का लक्ष्य भी तय कर दिया है।
इसका मकसद बंदरों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर प्राकृतिक ठिकाना उपलब्ध कराना है, ताकि भोजन और आश्रय की तलाश में उनके रिहायशी इलाकों में पहुंचने की समस्या कम हो सके। हालांकि इनके पूरी तरह से विकसित होने में कम से कम पांच-छह वर्ष का समय लगेगा।
प्रदेश में अब तक 120 नगरीय निकायों में 'कपि वन' विकसित किए जा चुके हैं। अब शेष 642 नगरीय निकायों में भी उपयुक्त भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। कपि वन में स्थानीय एवं फलदार प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी।
आबादी की ओर बढ़ा बंदरों का रुख
'कपि वन' विकसित करने के पीछे मूल उद्देश्य बंदरों को उनके प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप भोजन और आश्रय उपलब्ध कराना है। शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र कम होने और प्राकृतिक आवास प्रभावित होने से बंदरों का रुख आबादी की ओर बढ़ा है।
घरों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों के पहुंचने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। 'कपि वन' विकसित होने से बंदरों को आबादी से बाहर ही पर्याप्त भोजन और आश्रय उपलब्ध कराने का प्रयास होगा। इससे बंदरों के मानवों पर हमले कम होने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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'कपि वन' केवल बंदरों की समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रहेंगे। इनके जरिए नगरीय क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने और स्थानीय जैव विविधता को संरक्षण देने का भी प्रयास होगा।
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ऐसे स्थानों पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, जिससे समय के साथ ये क्षेत्र प्राकृतिक हरित क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकें। संबंधित निकायों को उपयुक्त स्थल चयन, पौधारोपण और उनके संरक्षण की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है।
