विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी में अब हर जिले के कॉलेज-अस्पतालों की खाली जमीन पर बनेंगे स्थाई हेलीपैड, सरकारी आदेश जारी

Published: Sun, 20 Sep 2026 06:30 PM (IST)Updated: Sun, 20 Sep 2026 06:42 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में अब जिला, तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों के पास स्थायी हेलीपैड बनाने के लिए कॉलेज, अस्पताल और अन्य सरकारी संस्थानों की खाली जमीन का उपयोग किया जाएगा।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. कॉलेज, अस्पताल की खाली जमीन पर बनेंगे हेलीपैड।

  2. भूमि उपलब्धता की समस्या दूर करने को लिया गया निर्णय।

  3. वीवीआईपी आवागमन, आपदा राहत में होंगे सहायक।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में सभी जिला, तहसील और ब्लाक मुख्यालयों के आसपास स्थाई हेलीपैड बनाए जाएंगे। योजना में मानक के मुताबिक भूमि मिलने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए शासन ने अब इंटर और डिग्री कालेज, इंजीनियरिंग कालेज, सरकारी अस्पतालों और अन्य संस्थानों की रिक्त पड़ी भूमि का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इन संस्थानों के अधिकारियों व प्रबंधन से बातचीत कर स्थाई हेलीपैड बनाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजें। जहां भी भूमि उपलब्ध होगी लोक निर्माण विभाग वहां स्थाई हेलीपैड का निर्माण करेगा।

हेलीपैड बनाने के लिए बातचीत प्रस्ताव होगा तैयार

पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे स्थाई हेलीपैड के लिए भूमि जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं। जिन ब्लाकों अथवा तहसीलों में भूमि मिलने में कठिनाई हो रही है, वहां कालेजों, अस्पतालों तथा ऐसे अन्य संस्थानों की रिक्त भूमि पर स्थाई हेलीपैड बनाने के लिए बातचीत कर प्रस्ताव तैयार करें।

प्रमुख सचिव के अनुसार, जिन 118 नए हेलीपैड के लिए भूमि मिल गई है, वहां स्थाई हेलीपैड का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। इन 118 हेलीपैडों के बनाने पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने नए तहसील और ब्लाक मुख्यालय भवन के साथ ही नए सर्किट हाउस निर्माण में स्थाई हेलीपैड बनाने की व्यवस्था भी की है।

यह भी पढ़ें- हिमालय छोड़कर इटावा पहंच रहे ये खास गिद्ध, चंबल से लेकर सफारी पार्क तक दिखा अनोखा नजारा

पीडब्ल्यूडी ने चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 736 नए हेलीपैड बनाने और 17 पुराने हेलीपैडों की मरम्मत का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक कुल 118 स्थानों पर ही हेलीपैड बनाने के लिए भूमि मिली है। सभी 736 हेलीपैड बन जाने पर प्रदेश में हर 20 किलोमीटर पर एक हेलीपैड होगा, जो वीवीआइपी भ्रमण और आपदा के समय राहत पहुंचाने में सहायक होगा। किराया देकर अन्य लोग भी इस हेलीपैड का उपयोग कर सकेंगे।

यह भी पढ़ें- यूपी में वाहनों के चालान सिस्टम में हुआ बड़ा बदलाव, अब 30 दिन के अंदर अधिकारियों को करना होगा समाधान

प्रत्येक हेलीपैड के लिए 100 मीटर लंबाई और 100 मीटर चौड़ाई की भूमि की आवश्यकता है। इसके साथ ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के मानकों के अनुसार हेलीपैड से पूर्व और पश्चिम की दिशा में 250 मीटर तक कोई ऊंचा अवरोध नहीं होना चाहिए।