विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमालय छोड़कर इटावा पहंच रहे ये खास गिद्ध, चंबल से लेकर सफारी पार्क तक दिखा अनोखा नजारा

Published: Sat, 19 Sep 2026 03:14 PM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2026 03:53 PM (IST)

इटावा में हिमालयन गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो अब झुंड में चंबल क्षेत्र और सफारी ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. हिमालयन गिद्ध अब इटावा में झुंड में दिखाई दे रहे हैं।

  2. चंबल क्षेत्र और सफारी पार्क में तीन दर्जन गिद्ध दर्ज।

  3. बच्चों की मौजूदगी से प्रजनन और ठहराव की संभावना बढ़ी।

जागरण संवाददाता, इटावा। कभी इक्का-दुक्का नजर आने वाले हिमालयन गिद्ध अब जनपद की धरती पर झुंड में दिखाई देने लगे हैं। चंबल क्षेत्र से लेकर इटावा सफारी पार्क तक इनकी तीन दर्जन मौजूदगी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि कई स्थानों पर हिमालयन गिद्धों के साथ उनके बच्चे भी दिखाई दिए हैं।

इससे वन्यजीव विशेषज्ञ इनके यहां ठहराव और कुनबा बढ़ने की संभावना जता रहे हैं। गिद्धों की यह बढ़ती मौजूदगी पर्यावरण के लिहाज से जिले के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। पिछले 10 वर्षों में इनकी संख्या लगभग तीन गुनी हो गई है।

इटावा सफारी पार्क में करीब एक वर्ष पहले पेड़ों पर दो दर्जन हिमालयन गिद्ध देखे गए थे। इससे पहले भरथना ब्लाक के ग्राम नगला गिरंद के समीप खाली पड़ी ऊसर भूमि पर भी करीब एक दर्जन हिमालयन गिद्धों की मौजूदगी सामने आई थी। वन विभाग और वन्यजीव संस्था के प्रतिनिधियों को जिले के विभिन्न हिस्सों में गिद्धों की मौजूदगी के फोटो और वीडियो भी मिले हैं।

Giddhon ki sankhya badhi

वन्यजीव विशेषज्ञ डा. राजीव चौहान के अनुसार, हिमालय क्षेत्र में भोजन की उपलब्धता कम होने के कारण इन गिद्धों का चंबल क्षेत्र की ओर आना एक कारण हो सकता है। पहले इनकी संख्या इक्का-दुक्का दिखाई देती थी, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ती नजर आ रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनके साथ छोटे गिद्ध भी देखे जा रहे हैं, जो यहां इनके प्रजनन अथवा लंबे समय तक ठहरने की संभावना का संकेत हो सकता है।

प्राकृतिक सफाईकर्मी हैं गिद्ध

गिद्धों को प्रकृति का प्राकृतिक सफाईकर्मी माना जाता है। ये मृत पशुओं के शवों को खाकर उन्हें तेजी से नष्ट करते हैं। इससे शवों के सड़ने से फैलने वाले रोगजनक जीवाणुओं और संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। गिद्धों के पाचन तंत्र में अत्यधिक अम्लीय वातावरण पाया जाता है, जो सड़े मांस में मौजूद अनेक रोगजनकों को निष्क्रिय करने में सक्षम होता है।

पशु दवाओं से गिद्धों को बड़ा खतरा

गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट के पीछे पशुओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं को प्रमुख कारणों में माना गया है। ऐसी दवा दिए गए मृत पशुओं के शव खाने पर गिद्धों की किडनी प्रभावित होकर उनकी मौत हो सकती है। इसके अलावा ऊंचे पेड़ों और सुरक्षित चट्टानी स्थानों की कमी तथा मृत पशुओं के शवों को दफनाने या रसायनों के संपर्क में आने से भी इनके लिए सुरक्षित भोजन की उपलब्धता प्रभावित होती है।

वन विभाग भी रख रहा नजर

डीएफओ विकास नायक के अनुसार, गिद्धों की गणना के दौरान जिले के विभिन्न हिस्सों में हिमालयन गिद्धों की मौजूदगी की जानकारी वन कर्मियों और वन्यजीव संस्था के प्रतिनिधियों को मिली है।

यह भी पढ़ें- लखनऊ से शुरू होगा कश्मीर का सुहाना सफर: IRCTC के 'जन्नत-ए-कश्मीर' पैकेज में करें श्रीनगर-सोनमर्ग और गुलमर्ग की सैर

कई स्थानों के वीडियो और फोटो भी लिए गए हैं। जिले में हिमालयन गिद्धों की संख्या इससे अधिक होने की संभावना है। गिद्ध संरक्षण को लेकर विभाग की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं।

इटावा में हिमालयन गिद्धों की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण?

यह भी पढ़ें- फसल ही नहीं, बिजली बेचकर भी मौज काट रहे बिजनौर के किसान, रोज बन रही 1.60 लाख यूनिट बिजली

 

हिमालयन गिद्ध का इटावा के चंबल क्षेत्र और सफारी पार्क तक पहुंचना केवल पक्षियों की आमदरफ्त भर नहीं है। यदि इनका ठहराव लंबे समय तक बना रहता है और बच्चे भी यहां दिखाई देते हैं, तो यह इनके आवास और भोजन की उपलब्धता से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। हालांकि इनके यहां नियमित प्रजनन की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक निगरानी और लगातार अवलोकन जरूरी होगा।