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पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगा वैश्विक मंच, ‘एक जिला एक व्यंजन’ योजना के तहत 50 लाख तक सब्सिडी

By Pulak TripathiEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Thu, 05 Nov 2026 10:51 PM (IST)

उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला एक व्यंजन' (ODOC) योजना पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाएगी। इसके ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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HighLights

  1. पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना लक्ष्य।

  2. गुणवत्ता सुधार, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग पर विशेष जोर।

  3. योजना में 50 लाख तक सब्सिडी, प्रशिक्षण का प्रावधान।

पुलक त्रिपाठी, लखनऊ। प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को स्थानीय बाजारों से आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी है। एक जिला एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना के तहत जिलों के विशिष्ट व्यंजनों की गुणवत्ता सुधारने, आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर जोर दिया जाएगा।

इसके लिए 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी और मार्केटिंग गतिविधियों के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता का प्रविधान है। उद्यमियों को आधुनिक तकनीक, खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और स्टैंडर्ड रेसिपी का प्रशिक्षण भी मिलेगा।

ओडीओसी की संभावनाओं और चुनौतियों पर आयोजित सत्र में प्रमुख सचिव, एमएसएमई शशि भूषण सुनील ने दैनिक जागरण के उप राज्य संपादक मनीष तिवारी के साथ संवाद में कहा कि ओडीओपी की सफलता के बाद ओडीओसी शुरू की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश की खानपान विरासत को आर्थिक विकास और रोजगार सृजन से जोड़ना है।

ओडीओसी से दिलाई जाएगी पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान

ओडीओपी के तहत प्रदर्शनियों, शोरूम और मार्केटिंग से जिलों के उत्पादों को पहचान और बाजार मिला। वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। इसमें एमएसएमई क्षेत्र और ओडीओपी उत्पादों की अहम भूमिका रही है। इसी माडल के आधार पर ओडीओसी से पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान दिलाई जाएगी।

खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के सवाल पर प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रशिक्षण योजना का अहम हिस्सा होगा। सीएफटीआरआइ और इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पैकेजिंग जैसी संस्थाओं के सहयोग से निर्माताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। पारंपरिक स्वाद बनाए रखते हुए स्टैंडर्ड रेसिपी तैयार करने पर भी जोर रहेगा।

स्वच्छता, ग्लव्स का इस्तेमाल, हाथों की सफाई, आधुनिक मशीनों और बेहतर विनिर्माण प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) समेत संबंधित विभागों का सहयोग लिया जाएगा। शेल्फ लाइफ, भंडारण और कोल्ड चेन व्यवस्था सुधारने के प्रयास भी होंगे।

बैंक मैनेजरों से किया जा रहा समन्वय

प्रमुख सचिव ने बताया कि योजना को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी और जिला स्तर पर लीड बैंक मैनेजरों के साथ समन्वय किया जा रहा है। शुरुआती दौर में वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, क्षमता विकास, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में सरकारी सहयोग जरूरी है। बाजार विकसित होने पर निजी निवेश और बाजार आधारित व्यवस्था से क्षेत्र को गति मिलेगी। ओडीओसी को पर्यटन और संस्कृति से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

शहरी स्थानीय निकायों के सहयोग से फूड स्ट्रीट विकसित करने पर विचार है। फूड पार्क का सुझाव भी विचाराधीन है। इससे स्थानीय व्यंजनों को मंच मिलने के साथ पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। शशि भूषण सुनील ने बताया कि सितंबर में नोएडा में हुए यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में ओडीओसी उत्पादों के स्टाल लोकप्रिय रहे।

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अलग हब में जिलों के व्यंजन प्रदर्शित किए गए और कई स्टालों के उत्पाद जल्दी बिक गए। अब तक 200 से अधिक व्यंजनों को जिलों के विशिष्ट उत्पाद के रूप में चिह्नित किया गया है। नए प्रस्ताव भी मिल रहे हैं।

ओडीओपी योजना के अगले चरण में सब्सिडी, गुणवत्ता सुधार, निर्यात प्रोत्साहन और कामन फैसिलिटी सेंटर जैसी व्यवस्थाएं बेहतर करने की योजना है। उन्होंने विश्वास जताया कि ओडीओसी भी ओडीओपी की तरह सफल होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी।

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