अयोध्या-काशी और मथुरा को बम से उड़ाने की धमकी: कानपुर से बिकने वाली फर्जी ईमेल ID से जुड़े तार, जांच में जुटी ATS
अयोध्या, काशी और मथुरा को बम से उड़ाने की धमकी के तार कानपुर से बेची गई फर्जी ईमेल आईडी से ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
अयोध्या, काशी, मथुरा को बम से उड़ाने की धमकी मिली।
कानपुर से बेची गई फर्जी ईमेल आईडी से जुड़े तार।
एटीएस 5 लाख ईमेल आईडी नेटवर्क की जांच कर रही।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। अयोध्या, काशी और मथुरा को बम धमाकों से दहलाने की धमकी भेजने के लिए कहीं कानपुर में तैयार की गई फर्जी ई-मेल आइडी का इस्तेमाल तो नहीं हुआ था? आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) इस आशंका के आधार पर पांच लाख फर्जी ई-मेल आइडी की खरीद-फरोख्त के नेटवर्क की पड़ताल कर रहा है।
कानपुर से गिरफ्तार अंकित शंखवार के लैपटाप में मिली ई-मेल आइडी और उनके पासवर्ड की जानकारी अब जांच के केंद्र में है। आशंका है कि इनमें से कुछ आइडी विदेश में बैठे खरीदारों तक पहुंची हों और उनका इस्तेमाल भारत में धमकी भरे संदेश भेजने के लिए किया गया हो।
एटीएस यह पता लगा रही है कि अंकित ने जिन लोगों को फर्जी ई-मेल आइडी बेची थीं, उन्होंने उनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया। जांच में पाकिस्तान और बांग्लादेश में बैठे लोगों को आइडी बेचे जाने के तथ्य सामने आए थे। इनके बदले क्रिप्टोकरेंसी से भुगतान किए जाने के साक्ष्य भी मिले थे। अब एजेंसी खरीदारों की पहचान, उनके डिजिटल संपर्क और ई-मेल खातों के इस्तेमाल का ब्योरा जुटा रही है।
एटीएस इन बातों का लगा रही पता
जांच एजेंसी का संदेह है कि फर्जी ई-मेल आइडी की खरीद-फरोख्त का यह नेटवर्क केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं हो सकता। इनका इस्तेमाल धमकी भरे संदेश भेजने, पहचान छिपाने और सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए भी किया जा सकता है। ऐसे में एटीएस यह भी खंगाल रही है कि अयोध्या, वाराणसी और मथुरा के स्कूलों तथा धार्मिक स्थलों को भेजे गए ई-मेल किन सर्वर और नेटवर्क के जरिये भेजे गए थे।
29 अक्टूबर को गिरफ्तार अंकित शंखवार पर प्राक्सी नेटवर्क और वाई-फाई के माध्यम से फर्जी ई-मेल आइडी तैयार कर विदेश में बैठे लोगों को बेचने का आरोप है। उसके लैपटाप से करीब पांच लाख ई-मेल आइडी, पासवर्ड और रिकवरी संबंधी जानकारियां मिली थीं। एजेंसी अब इन डिजिटल जानकारियों का ताजा धमकियों में इस्तेमाल किए गए ई-मेल खातों से मिलान कर रही है।
आठ से 27 नवंबर के बीच धमाकों की चेतावनी वाले संदेश में खालिस्तान नेशनल आर्मी का नाम भी लिखा गया है। इससे पहले भी अलग-अलग स्थानों पर धमकी भरे ई-मेल मिलने के मामले सामने आ चुके हैं।
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एटीएस पुराने मामलों में इस्तेमाल ई-मेल खातों की भी पड़ताल कर रही है, ताकि पता चल सके कि कहीं एक ही नेटवर्क या विदेशी हैंडलर्स अलग-अलग नामों और पहचान के साथ धमकियां तो नहीं भेज रहे हैं। हालांकि, अंकित के नेटवर्क और ताजा धमकियों के बीच सीधा संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है।