यूपी में जिलेवार तय होगा युवाओं का हुनर, अब हर जिले में स्थानीय मांग के हिसाब से मिलेगा रोजगार
उत्तर प्रदेश में अब युवाओं को स्थानीय मांग के अनुसार हुनरमंद बनाया जाएगा, जिससे उन्हें अपने जिले या आसपास ही रोजगार मिल सके।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
युवाओं को स्थानीय मांग के अनुसार हुनरमंद बनाया जाएगा।
कौशल विकास मिशन ने जिलेवार रोजगार क्षेत्रों की मैपिंग की।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप होंगे।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में अब युवाओं को रोजगार के लिए सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि स्थानीय मांग के मुताबिक हुनर दिया जाएगा। किस जिले में किस क्षेत्र में रोजगार की सबसे अधिक संभावनाएं हैं, इसका खाका उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने तैयार किया है।
जिलेवार चिह्नित रोजगार क्षेत्रों के आधार पर प्रशिक्षण संस्थानों को पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण की प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी। साथ ही स्थानीय कंपनियों और उद्योगों से प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर है।
जिलों के रोजगार मैपिंग में कृषि, स्वास्थ्य, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रानिक्स, ऑटोमोबाइल, पर्यटन एवं आतिथ्य, आईटी-आइटीईएस, निर्माण, खुदरा, हरित रोजगार, हस्तशिल्प और वस्त्र समेत कई क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इससे जिले की अर्थव्यवस्था और वहां उपलब्ध रोजगार के अवसरों के अनुरूप युवाओं को तैयार किया जा सकेगा।
जैसे कुशीनगर में कृषि एवं कृषि प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं आतिथ्य, परिधान एवं घरेलू साज-सज्जा और खाद्य प्रसंस्करण को प्रमुख क्षेत्र माना गया है। गोरखपुर में इलेक्ट्रानिक्स, स्वास्थ्य, लाजिस्टिक्स, पर्यटन एवं आतिथ्य और परिधान, जबकि महाराजगंज में कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन, फर्नीचर और खुदरा क्षेत्र चिह्नित हैं।
लखनऊ में एयरोस्पेस एवं एविएशन, कृषि एवं प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग-वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य, आइटी-आइटीईएस, लाइफ साइंसेज, खाद्य प्रसंस्करण, फर्नीचर, बिजली, खुदरा और ब्यूटी एवं वेलनेस प्रमुख क्षेत्र हैं।
आगरा में चमड़ा, स्वास्थ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिधान, हस्तशिल्प, रत्न एवं आभूषण, पर्यटन, ऑटोमोबाइल और खाद्य प्रसंस्करण को अवसर वाला क्षेत्र माना गया है। भदोही में कालीन व हस्तशिल्प, मुरादाबाद में हस्तशिल्प, फर्नीचर व लाजिस्टिक्स, कानपुर नगर में स्वास्थ्य, हरित रोजगार, रबर-रसायन व विनिर्माण तथा नोएडा में इलेक्ट्रानिक्स, स्वास्थ्य, आईटी-आईटीईएस, मीडिया और खुदरा क्षेत्र पर फोकस रहेगा।
व्यावसायिक शिक्षा व कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल का कहना है कि इससे युवाओं को प्रशिक्षण के बाद अपने जिले या आसपास ही रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसलिए आईटीआई और प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं के कौशल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश में कौशल विकास मिशन की स्थिति
- प्रशिक्षण केंद्र- 10787
- ट्रेनिंग पार्टनर- 1034
- सक्रिय कोर्स- 528
- प्रशिक्षण के लिए उम्र सीमा- 14 से 35 वर्ष निश्शुल्क
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