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अब प्रदूषण पर रहेगी AI की निगरानी, STP-CETP से लेकर उद्योगों तक होगी नजर; गड़बड़ी मिलने ही कमांड सेंटर पहुंचेगा अलर्ट

Published: Thu, 01 Oct 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब प्रदूषण की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करेगा। इसके तहत एसटीपी, ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एआई आधारित निगरानी करेगा।

  2. एसटीपी, सीईटीपी और उद्योगों के आंकड़ों की जांच होगी।

  3. असामान्य गतिविधियों पर एआई तुरंत अलर्ट जारी करेगा।

शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। प्रदूषण की निगरानी में अब सिर्फ आंकड़े जुटाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उनकी हरकत भी पकड़ी जाएगी। किसी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का संचालन अचानक बंद हुआ, औद्योगिक ट्रीटमेंट प्लांट के आंकड़ों में असामान्य बदलाव आया या किसी उद्योग के आनलाइन प्रदूषण आंकड़ों में गड़बड़ी दिखी तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) इसे पकड़ लेगा।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब मौजूदा आनलाइन निगरानी व्यवस्था के ऊपर एआइ आधारित विश्लेषण की नई परत जोड़ने की तैयारी में है। इसके लिए बोर्ड ने आइआइआइटी लखनऊ के साथ समझौता भी किया है।

वर्तमान में उद्योगों और ट्रीटमेंट प्लांट से आनलाइन आंकड़े मिलते हैं। अधिकारी इनकी निगरानी कर जरूरत पड़ने पर निरीक्षण और कार्रवाई करते हैं। नई व्यवस्था में एआइ पुराने और रियल टाइम आंकड़ों का मिलान कर सामान्य पैटर्न समझेगा। इससे अचानक होने वाले बदलाव या असामान्य गतिविधि को जल्दी चिह्नित किया जा सकेगा। प्रदेश में करीब 160 एसटीपी हैं।

क्या-क्या होगा दायरे में?

इनके संचालन और शोधन प्रक्रिया से जुड़े आनलाइन आंकड़ों पर एआइ की नजर रखने की तैयारी है। प्लांट बंद होने या संचालन में असामान्य स्थिति आने पर सिस्टम संबंधित अधिकारियों को अलर्ट देने में सक्षम बनाने की दिशा में काम करेगा। इसके लिए बोर्ड में एक कमांड सेंटर भी बनाया जाएगा। औद्योगिक प्रदूषित पानी के शोधन के लिए संचालित पांच कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) भी इसके दायरे में होंगे।

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उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाले प्रदूषण की निगरानी के लिए कंटीन्यूअस एमिशन मानिटरिंग सिस्टम (सीईएमएस) लगे हैं। इनसे आनलाइन आंकड़े मिलते हैं, लेकिन सेंसर के कैलिब्रेशन, रखरखाव और डाटा की विश्वसनीयता को लेकर चुनौतियां हैं। एआइ आंकड़ों के पैटर्न में असामान्यता तलाशकर संदिग्ध डाटा को चिह्नित करने में मदद करेगा।

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बोर्ड के अध्यक्ष डा. रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आइआइआइटी, अधिकारियों की एआइ आधारित निगरानी और आंकड़ों के विश्लेषण की क्षमता विकसित करेगा। परियोजना में लाइव कैमरा फीड, आनलाइन सीईएमएस डाटा और बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट व निस्तारण सुविधाओं के विश्लेषण के लिए एआइ टूल विकसित करने की योजना है। इससे कचरे के निस्तारण और संबंधित सुविधाओं के संचालन की निगरानी भी मजबूत हो सकेगी। प्रदेश में करीब दो लाख अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का इन प्लांटों में निस्तारण होता है।