नवजातों की देखभाल के लिए यूपी में खुलेंगी 416 नई NBSU यूनिट, 75 जिलों में स्थापित होंगी 329 कंगारू मदर केयर इकाइयां
उत्तर प्रदेश में कमजोर और कम वजन वाले नवजातों के इलाज के लिए 416 नई न्यूबार्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) स्थापित की जाएंगी, जिससे कुल संख्या 833 हो जाएगी।

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HighLights
कमजोर नवजातों के लिए 416 नई एनबीएसयू इकाइयां बनेंगी।
प्रदेश में कुल 833 एनबीएसयू इकाइयां कार्यरत होंगी।
75 जिलों में 329 कंगारू मदर केयर इकाइयां स्थापित हैं।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। जन्म के बाद कमजोर, कम वजन या गंभीर हालत वाले नवजातों को इलाज के लिए दूर के चिकित्सालयों तक नहीं जाना पड़ेगा। ऐसे बच्चों को जन्म के तुरंत बाद उपचार और निगरानी उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 416 नयी न्यूबार्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
वर्तमान में 417 एनबीएसयू कार्यरत हैं। नयी इकाइयां शुरू होने के बाद प्रदेश में इनकी संख्या 833 हो जाएगी। इससे नवजातों की हालत स्थिर करने के लिए उपचार दिया जाएगा, नवजात मृत्यु दर में कमी भी आएगी। सांस लेने में परेशानी वाले बच्चों के उपचार के लिए 146 बबल सीपैप मशीनें भी खरीदी गई हैं।
समय से पहले जन्म लेने वाले और कम वजन के बच्चों की देखभाल के लिए प्रदेश के 75 जिलों में 329 कंगारू मदर केयर इकाइयां स्थापित हैं। इनमें मां के शरीर की गर्माहट और दूसरी जरूरी देखभाल के जरिए कमजोर नवजातों की देखभाल की जाती है। माता-पिता को बच्चे के खान-पान और घर पर देखभाल के तरीके भी बताए जाते हैं, ताकि अस्पताल से छुट्टी के बाद नवजात की देखभाल में कोई कमी न रहे।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की निदेशक डा. पिंकी जोवल ने बताया कि नवजातों की देखभाल के लिए होम बेस्ड न्यूबार्न केयर (एचबीएनसी) कार्यक्रम भी चल रहा है। इसके तहत आशा कार्यकर्ता प्रसव के बाद 42 दिनों तक घर जाकर नवजात के स्वास्थ्य की निगरानी करती हैं। माताओं और परिवार के सदस्यों को स्तनपान, स्वच्छता और शिशु की देखभाल के बारे में जानकारी दी जाती है।
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वित्तीय वर्ष 2025-26 में आशा कार्यकर्ताओं ने 39,31,993 नवजातों के घरों का भ्रमण किया। इन भ्रमणों के दौरान नवजातों के स्वास्थ्य की निगरानी, बीमारी या खतरे के लक्षणों की पहचान और इलाज किया गया है।
