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यूपी के स्टार्टअप इन्क्यूबेटर्स पर कसेगा शिकंजा, नई नीति के तहत मान्यता के लिए पोर्टल पर करना होगा अप्लाई

Published: Fri, 18 Sep 2026 08:09 PM (IST)

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति के तहत इन्क्यूबेटर्स को मिलने वाले प्रोत्साहन अनुदान में पारदर्शिता के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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HighLights

  1. इन्क्यूबेटर्स को प्रोत्साहन अनुदान में पारदर्शिता के लिए नए दिशा-निर्देश।

  2. गलत जानकारी देने पर अनुदान निरस्त, ब्याज सहित वसूली होगी।

  3. मान्यता के लिए स्टार्टअप पोर्टल पर आवेदन करना होगा अनिवार्य।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति के तहत इन्क्यूबेटर्स को मिलने वाले प्रोत्साहन अनुदान में पारदर्शिता के लिए शासन ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। आवेदन, दावे, उपयोगिता प्रमाणपत्र, स्टार्टअप के आंकड़ों या अन्य अभिलेखों में किसी भी स्तर पर गलत, तथ्यहीन या भ्रामक जानकारी मिलने पर संबंधित प्रोत्साहन अनुदान निरस्त किया जा सकेगा। संबंधित संस्था से अनुदान की धनराशि की ब्याज समेत वसूली भी की जाएगी।

जुलाई में अधिसूचित नई स्टार्टअप नीति अगले पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगी। नीति के तहत इन्क्यूबेटर के रूप में मान्यता पाने के इच्छुक पात्र संस्थानों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा। आवेदन स्टार्टअप पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।

इसके साथ सभी जरूरी सहायक अभिलेख भी पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। डा. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू), लखनऊ से संबद्ध संस्थानों के आवेदन एकेटीयू के कुलपति की संस्तुति के बाद नीति की क्रियान्वयन इकाई के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

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अन्य सभी संस्थानों के आवेदन सीधे नोडल एजेंसी के स्तर से जांचे जाएंगे। नोडल एजेंसी या एकेटीयू को प्राप्त आवेदनों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मूल्यांकन किया जाएगा। एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों के मामले में कुलपति संबंधित क्षेत्र के लिए भौतिक सत्यापन समिति गठित करेंगे।

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समिति में संबंधित क्षेत्रीय जोन में स्थित एकेटीयू के राजकीय अथवा शासकीय घटक संस्थानों के प्रोफेसर, एकेटीयू का एक प्रतिनिधि और उसी क्षेत्रीय जोन में स्थित किसी प्रतिष्ठित व मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर का प्रतिनिधि शामिल होगा। यह समिति संस्थान के दावे और उपलब्ध सुविधाओं का भौतिक सत्यापन करेगी।