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Smart Meter Update: बैलेंस आते ही 10 मिनट में जोड़ें बिजली कनेक्शन, UPPCL ने आयोग में दाखिल किया प्रस्ताव

Published: Fri, 13 Mar 2026 09:23 AM (IST)

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं का कनेक्शन बैलेंस आते ही दो ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. बैलेंस आते ही 10 मिनट में कनेक्शन बहाल हो।

  2. देरी होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाए।

  3. पोस्टपेड का विकल्प और पारदर्शी बिलिंग मिले।

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर उन्हें एक प्रस्ताव सौंपा, जिसमें यह कहा गया कि पाजिटिव बैलेंस होते ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़े उपभोक्ताओं का कनेक्शन दो घंटे की जगह सिर्फ दस मिनट में बहाल किया जाए।

त्रिपुरा व आंध्र प्रदेश नियामक आयोग का आदेश सामने रखा, जिसमें प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बैलेंस आते ही 15 मिनट में कनेक्शन जोड़ दिया जाता है। तर्क दिया कि अन्य राज्यों में भी दस मिनट तक का प्रविधान है, इसलिए उत्तर प्रदेश में दो घंटे बाद कनेक्शन देने का नियम निरस्त किया जाना चाहिए।

उपभोक्ता परिषद ने यह भी मांग रखी कि दस मिनट में कनेक्शन ना जुड़े तो उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाना चाहिए। परिषद ने प्रस्ताव में कहा है कि उपभोक्ताओं से सहमति लिए बिना उन्हें प्रीपेड मोड में रखा जा रहा है, जबकि उन्हें पोस्टपेड का भी विकल्प देना चाहिए।

विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत सभी उपभोक्ताओं को दोनों प्रकार के भुगतान विकल्प उपलब्ध कराए जाने का नियम है, लेकिन बिजली कंपनियां मनमानी करके उन्हें कोई विकल्प नहीं दे रही है। परिषद ने यह भी कहा कंज्यूमर राइट रूल-2020 के तहत उपभोक्ताओं के यहां अनिवार्य रूप से प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ग्रामीण और शहरी सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली आपूर्ति अनिवार्य है।

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परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ताओं को पारदर्शी बिजली बिल की जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराने की मांग की है। वर्मा ने कहा कि लाखों बिजली उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए यूपीईआरसी को इस जनहित प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक संशोधन और निर्देश जारी करने चाहिए।